दिल्ली में देश ही नहीं बल्कि एशिया का सबसे विशाल अदालती परिसर तीस हजारी है। किसी भी अदालती परिसर में इतने कक्ष नहीं है जितने दिल्ली की तीस हजारी अदालत में है। इसका नाम तीस हजारी कोर्ट क्यों पड़ा इसके पीछे एक इतिहासिक घटना छिपी हुई है।
दिल्ली में देश ही नहीं बल्कि एशिया का सबसे विशाल अदालती परिसर तीस हजारी है। किसी भी अदालती परिसर में इतने कक्ष नहीं है जितने दिल्ली की तीस हजारी अदालत में है। इसका नाम तीस हजारी कोर्ट क्यों पड़ा इसके पीछे एक इतिहासिक घटना छिपी हुई है। 1783 में पराक्रमी सरदार बघेल सिंह ने अपने 30 हजार सैनिकों के साथ यहां बने खाली मैदान में डेरा डाला था। मुगल सेना को पराजित करने के बाद बघेल सिंह ने 11 मार्च 1783 को दिल्ली के लालकिले के दीवाने-ए-आम पर कब्जा कर लिया था। जिसके बाद मुगल बादशाह शाह आलाम द्वितीय ने मुंशी राम दयाल और बेगम समरू को बघेल सिंह के पास समझौते के लिए भेजा। जिसके बाद बघेल सिंह इस शर्त पर यहां से वापस लौटे कि दिल्ली में सिखों की इतिहासिक जगहों पर गुरुद्वारों का निर्माण किया जाएगा और उनकी सेना पर होने वाला सारा खर्चा मुगल बादशाह देगा। शाह आलम ने बघेल सिंह की शर्त को मान लिया।
सरदार बघेल सिंह की सिख गुरुओं में अपार आस्था थी। वह बेहद निडर अनुशासित, साहसी, करुणावान और क्षमतावान सैन्य कमांडर थे। बघेल सिंह पंजाब की किरोडिया मिसल के सरदार थे। उन्होंने ही पंजाब में घुसे अफगानी लुटेरे अहमद शाद अब्दाली को मार भगाया था और उसके चंगुल से हजारों बंदियों को मुक्त करा कर नया जीवन दिया था। बघेल सिंह ने दिल्ली में सात एतिहासिक गुरुद्वारों का निर्माण कराया जिनमें माता सुंदरी गुरुद्वारा, बंगला साहिब गुरुद्वारा, बाला साहिब गुरुद्वारा, रकाबगंज गुरुद्वारा, शीशगंज गुरुद्वारा, मोतीबाग गुरुद्वारा और मजून का टीला गुरुद्वारा शामिल है।
बघेल सिंह की सिख सेना के इस स्थान पर डेरा डालने से पहले इस मैदान के आपपास फलों के बाग हुआ करते थे। जब बघेल सिंह की सेना यहां पहुंची तो उन्होंने यहां अपनी सेना के घोड़ों का अस्तबल भी बना दिया। बघेल सिंह की सेना 4 साल तक इस स्थान पर डटी रही थी।
जब शाह आलम ने बघेल सिंह की सभी शर्तों को स्वीकार कर लिया तो उन्होंने जीत की खुशी में यहां मिठाई बाटी। कहा जाता है कि उस वक्त जो मिठाई बाटी जा रही थी वह पास के ही एक छोटे से पुल के पास रखी गई थी। जिसके बाद उस पुल का नाम ही पुल मिठाई हो गया। आजादी के बाद 1958 में इस स्थान पर पहली बार जिला अदालत का संचालन शुरू हुआ। जिसके बाद इस पूरे इलाके को तीस हजारी कहा जाने लगा। दरअसल तीस हजारी शब्द बघेल सिंह की तीस हजार सेना से आया था। सिखों की तीस हजारी सेना को उस वक्त तीस हजारी फौज कहा गया था।
1908 में अंग्रेजों ने इस इलाके में एक अस्पताल खोला जिसे सेंट स्फीफंस अस्पताल कहा गया। मगर बहुत से लोग 70 के दशक तक उसे तीस हजारी अस्पताल ही कहते थे। आज इस स्थान की पूरी तरह से कायाल्प हो चुका है। तीस हजारी अदालत के समाने मेट्रो स्टेशन बन गया है। हालांकि इससे पहले अंग्रेजों ने तीस हजारी नाम से एक छोटा रेलवे स्टेशन यहा स्थापित किया था। जिसका उपयोग दिल्ली के लोगों द्वारा किया जाता था।

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