1857 की क्रांति

निखिल मिश्रा

1857 की क्रांति भारत में ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ लड़ी गई थी। इसे सिपाही विद्रोह, सिपाही बगावत, या फिर वीर सावरकर ने इसे प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के नाम से भी कहा।

1857 की क्रांति भारत की स्वाधीनता के लिए लड़ी गई एक महत्वपूर्ण लड़ाई थी। इसे भारत के स्वतंत्रता संग्राम की शुरुआत के रूप में भी जाना जाता है।

1857 की क्रांति भारत में ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ लड़ी गई थी। इसे सिपाही विद्रोह, सिपाही बगावत, या फिर वीर सावरकर ने इसे प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के नाम से भी कहा।

इस आंदोलन के पीछे कई कारण थे, जिनमें आम जनता के साथ अत्याचार, ब्रिटिश सत्ताधारी व्यवस्था की नीतियों में अपने हित को ध्यान में रख बदलाव, सिपाहियों की वेतन-भत्तों में कटौती और धर्म-जाति के अंतर को बढ़ावा देने जैसे मुद्दे शामिल थे।

क्रांति के कई कारण थे, जिनमें से कुछ निम्नलिखित हैं:

ब्रिटिश सत्ता के विभिन्न नीतियों का संघर्ष जैसे कि जमींदारी व्यवस्था, पशुपालन व्यवस्था, जंगल में प्रवेश पर रोक आदि। ऐसे कानून बनाए जा रहे थे जो भारतीय लोगों के जीविका के साधन के साथ-साथ संस्कृति के खिलाफ भी था।

अंग्रेजों का सामंतों और जमींदारों की क्रूरता और अत्याचार पर खुला समर्थन था तथा उस में अपना लाभ भी देखना।

इस क्रांति ने भारतीय राजनीति पर गहरा प्रभाव डाला।

इसके बाद ब्रिटिश साम्राज्य ने भारत में राजनीतिक और आर्थिक बदलाव के रास्ते पर काम करना शुरू किया।

प्रथम क्रांति ने अंग्रेजों को भारतीयों के प्रति समझौते करने और उनकी मांगों को समझने के लिए मजबूर किया। सत्ताधारी ब्रिटिश सरकार को इस बात का अनुभव कराया कि भारत के लोग अपने अधिकारों के लिए लड़ने के लिए तैयार हैं और अपने हक के लिए लड़ते रहेंगे।

दूसरी इस क्रांति ने भारत में स्वराज के आवाहन का संदेश दिया। स्वतंत्रता के लिए लड़ने की इच्छा भारत के अनेक लोगों में पैदा हुई और वे अब अपनी आवाज उठाने के लिए तैयार हुए। इससे पहले, स्वतंत्रता के लिए लड़ने की आवश्यकता की नही समझी जाती थी।

क्रांति के बाद ब्रिटिश सरकार ने भारत के सामंतों और जमींदारों को नुकसान पहुंचाने वाली नीतियों में सुधार करना शुरू किया हालाँकि भारतीयों का शोषण में कोई कमी नही आई।

1858 में ब्रिटिश सरकार ने भारत में ईस्ट इण्डिया कम्पनी से अधिकार अपने हाथ में ले लिए। 1858 से पहले भारत में ब्रिटिश सरकार नही बल्कि वहां की एक कंपनी शासन कर रही थी।

इस प्रकार, भारत में ब्रिटिश सत्ता की आधिकारिक राजनीति बदल गई और उसके साथ ही भारतीय राजनीति भी एक नया मोड लेने लगी। इसके बाद, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के साथ-साथ नई राजनीतिक जागरूकता और संघर्ष भी उत्पन्न हुए।

इसकी शुरुआत भले ही सैनिकों के असंतोष के कारण हुआ हो लेकिन इसमें लगभग सभी वर्ग के लोग शामिल थे। और आम आदमी का योगदान अतुलनीय था। लोग रात में छुप कर गांव-गांव जा कर प्रचार करते थे।

 

इंद्रप्रस्थ संवाद - नवीन अंक