कृषि में महिला किसानों की प्रतिष्ठा को समाज में किसान के रूप में स्थापित करने और कृषि कार्य की चुनौतियों को उजागर करने के उद्देश्य से भारतीय किसान संघ द्वारा अखिल भारतीय महिला किसान कार्यकर्ता सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है।
नई दिल्ली, 28 सितंबर 2026। वर्ष 2026 को संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा अंतर्राष्ट्रीय महिला किसान वर्ष घोषित किया गया है। इस अवसर पर कृषि में महिला किसानों की प्रतिष्ठा को समाज में किसान के रूप में स्थापित करने और कृषि कार्य की चुनौतियों को उजागर करने के उद्देश्य से भारतीय किसान संघ द्वारा अखिल भारतीय महिला किसान कार्यकर्ता सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है।
यह सम्मेलन 30 सितंबर 2026, दिन बुधवार को सुबह 9:00 बजे से इंदिरा गांधी इनडोर स्टेडियम (के. डी. जाधव), नई दिल्ली में आयोजित होगा। जिसमें देश भर के सभी राज्यों से हजारों महिला किसान कार्यकर्ता सम्मिलित होंगी।
सम्मेलन का मुख्य आकर्षण विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिला किसानों का सम्मान होगा। इस अवसर पर गौ कृषि वाणिज्यम्, जैविक खेती, बीज संरक्षण, पशुपालन, रोजगार व खाद्य प्रसंस्करण जैसी श्रेणियों में देश भर से चयनित महिला किसानों को सम्मानित किया जाएगा।
गौरतलब है कि आज भारत में बोआई, रोपाई, कटाई, खरपतवार नियंत्रण और पशुपालन जैसे 60 से 80 प्रतिशत कृषि कार्यों को महिलायें ही संभालती हैं। वे पीढ़ियों से चले आ रहे पारंपरिक कृषि ज्ञान, देशी बीजों के संरक्षण व जैव विविधता को बचाये रखने में सबसे अहम भूमिका निभा रही हैं। गौ कृषि वाणिज्यम् की संकल्पना को मूर्तिरूप देने, रसायनमुक्त अन्न के लिये "गौ आधारित जैविक खेती व प्राकृतिक खेती" को धरातल पर उतारने और परिवार व समाज के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने में महिलाओं की अग्रणी भूमिका है। आज महिलाएं कृषि, दुग्ध उत्पादन व ग्रामीण हस्तशिल्प के माध्यम से न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ कर रही हैं, बल्कि कृषि प्रबंधन व निर्णय लेने की प्रक्रिया में भी सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं।
ध्यान हो कि भारतीय किसान संघ देश का सबसे बड़ा किसान संगठन है। आज देश भर के 60 हजार से अधिक गांवों में हमारी ग्राम समितियां गठित हैं। जिनमें 42 लाख से अधिक महिला व पुरुष किसान कार्यकर्ता सक्रिय सदस्य के तौर पर कार्य कर रहे हैं। जिसमें लगभग 7 लाख महिला किसान कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी है। संघ का मूल मंत्र है - "कृषिमित् कृषस्व-खेती ही करो"

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