भारत की अर्थव्यवस्था पर नियंत्रण करने का प्रयास है। यह शरिया को पीछे के दरवाजे से देश पर थोपने का काम करता है तथा राष्ट्रविरोधी तत्वों को प्रोत्साहन एवं सहयोग देता है।
नई दिल्ली, 23 सितंबर 2026। हलाल प्रमाणन एक षड्यंत्र है। व्यापार में लगे हिन्दुओं व सिक्खों के रोजगार को छीनने का षड्यंत्र है। भारत की अर्थव्यवस्था पर नियंत्रण करने का प्रयास है। यह शरिया को पीछे के दरवाजे से देश पर थोपने का काम करता है तथा राष्ट्रविरोधी तत्वों को प्रोत्साहन एवं सहयोग देता है।
हलाल नियंत्रण मंच द्वारा आयोजित प्रेसवार्ता में हलाल प्रमाणन के नाम पर चल रहे षड्यंत्रों को लेकर वक्ताओं ने आरोप लगाए गए। प्रेसवार्ता को मंच के प्रवक्ताओं, प्रसिद्ध उद्योगपति एवं समाजसेवी हरिंदर सिक्का तथा सेवानिवृत्त न्यायाधीश पवन कुमार ने संबोधित किया।
हरिंदर सिक्का ने बताया कि पहले हलाल केवल पशु मांस तक सीमित था। कांग्रेस सरकारों के साथ षड्यंत्र कर कुछ मौलानाओं ने APEDA के माध्यम से यह आदेश जारी करवा दिया कि बिना हलाल प्रमाणन के किसी मांस का निर्यात नहीं हो सकता। हलाल का प्रमाण देने वाला मौलवी तभी यह प्रमाण-पत्र देता था, जब एक मुसलमान ही पशुवध करता था।
अनुसूचित समाज व सिक्ख समाज का एक बड़ा वर्ग, जो इस व्यापार में था, एक झटके में बेरोजगार हो गया। रेलवे, एयरलाइंस, होटलों आदि ने हलाल मांस ही खरीदना शुरू कर दिया। सिक्ख धर्म में हलाल मांस को ‘पाप’ माना गया है। पूरे देश के हिन्दू व सिख समाज को जबरन हलाल मांस खिलाकर उनकी धार्मिक आस्था पर डाका डाला गया।
वर्तमान सरकार अभिनंदन की पात्र है, जिन्होंने हमारी पहल पर APEDA के अवैध आदेश को वापस लिया। इन षड्यंत्रों की भीषणता का अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि अगर कहीं कोई ‘झटका’ की दुकान खोलता है तो उस पर प्राणघातक हमले किए जाते हैं।
सेवानिवृत्त न्यायाधीश पवन कुमार ने कहा कि अब हलाल प्रमाणन का षड्यंत्र केवल मांस तक सीमित नहीं रह गया है। मौलानाओं ने मुस्लिम समाज को प्रेरित किया कि वे जीवन में उपयोग आने वाली हर वस्तु – जैसे औषधियाँ, श्रृंगार सामग्री, खाने-पीने का सामान, भवन आदि – तभी खरीदें, जब वे हलाल प्रमाणित हों।
कांग्रेस सरकारें इस हिन्दू-विरोधी व राष्ट्र-विरोधी षड्यंत्र का हिस्सा बनीं तथा जमीयत उलेमा-ए-हिंद सहित चार मुस्लिम संस्थाओं को हलाल प्रमाण-पत्र देने का असंवैधानिक आदेश दिया, जो भारी भरकम फीस लेकर यह प्रमाण-पत्र जारी करवाते हैं।
मुसलमान तो इन सामानों का केवल 12 प्रतिशत खरीदता है। 88 प्रतिशत ग्राहक गैर-मुस्लिम हैं। उनकी गाढ़ी कमाई का बड़ा हिस्सा इन संस्थाओं में जा रहा है, जो इस पैसे का उपयोग धर्मांतरण, लव जिहाद, आतंकियों के सहयोग, मुस्लिम समाज में मतांतरण निर्माण आदि राष्ट्रविरोधी कार्यों के लिए करते हैं।
उन्होंने कहा कि कुछ प्रदेशों ने हमारी पहल पर इस षड्यंत्र पर कुछ नियंत्रण किया तो इन राष्ट्रविरोधी कामों की फंडिंग में कमी आई। कुछ मौलाना कभी-कभी ‘मुसलमान असुरक्षित हैं’ का राग अलापकर मुस्लिम समाज को भड़काते हैं। उनकी यह भड़ास इस बात का प्रमाण है कि उनकी अवैध फंडिंग पर रोक लगी है।
पवन कुमार ने कहा कि हलाल नियंत्रण मंच हलाल प्रमाणन के इस राष्ट्र विरोधी व समाज विरोधी षड्यंत्र पर पूर्ण नियंत्रण के लिए प्रतिबद्ध है। हमने कुछ मंत्रियों तथा प्रशासनिक अधिकारियों को मिलकर जब इस षड्यंत्र की जानकारी दी तो वे आश्चर्यचकित रह गए।
अब हमने निर्णय लिया है कि –
- 28 व 29 सितंबर, 2026 को पूरे देश के सभी प्रांतों की राजधानियों में बड़े प्रदर्शनों का आयोजन किया जाएगा। युवा शक्ति बड़ी संख्या में इन प्रदर्शनों में भाग लेगी।
- पूरे देश के सभी प्रांतों में इस वर्ष के अंत तक ‘हलाल नियंत्रण मंच’ की स्थापना की जाएगी, जिसमें समाज के सभी वर्गों के सदस्य सम्मिलित किए जाएंगे।
- साहित्य का निर्माण प्रारंभ हो गया है, जो इन षड्यंत्रों और मौलानाओं की कारगुजारियों को उजागर करेगा। इस साहित्य का राष्ट्रव्यापी वितरण शीघ्र प्रारंभ कर दिया जाएगा।
- केंद्रीय मंत्रियों, राज्यों के मुख्यमंत्रियों व स्थानीय निकायों के प्रमुखों से मिलकर हलाल नियंत्रण की दिशा में सार्थक कदम उठाने का आग्रह करेंगे।
- गोष्ठियों और जनसभाओं का आयोजन कर इस षड्यंत्र के विषय में जागरूकता निर्माण की जाएगी।
- सिक्ख समाज व अनुसूचित जाति/जनजाति समाज के नेतृत्व से संपर्क कर उनकी धार्मिक आस्थाओं पर हो रहे आघात तथा छिन रहे रोजगार के विषय में जागरूक किया जाएगा।

IVSK




