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भारत ही एक ऐसा दैश है जो विश्व में सुख-शांति की कामना करता है – रामलाल जी

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख रामलाल जी ने कहा कि भारत ही एक ऐसा देश है जो विश्व में सुख-शांति की कामना करता है और उसके लिए काम करता है। विदेश के लोग भी कहते हैं कि भारत को समझना है तो हमें स्वामी विवेकानंद जी की दृष्टि से देखना होगा।

गोरखपुर, 10 सितंबर 2026। संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त गोरखपुर महानगर द्वारा सरस्वती शिशु मंदिर पक्कीबाग में आयोजित “युवा उद्यमी संवाद” में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख रामलाल जी ने कहा कि संघ की 100 वर्ष की यात्रा पूरी हुई है। यह यात्रा सामान्य नहीं रही, तमाम पाबंदी और झंझावात को झेल कर संघ आगे बढ़ा है। संघ ने शुरु से ही उपहास एवं उपेक्षा का सामना किया है, इसलिए संघ उपेक्षा एवं विरोध से घबराता नहीं है। संघ की स्थापना देश-समाज के लिए अच्छा करने के लिए, भारत को बड़ा बनाने के लिए हुई है। देश में आपदा आती है तो संघ का स्वयंसेवक सबसे आगे खड़ा होता है। इस बात की सराहना सभी करते हैं।

उन्होंने कहा कि संघ सदैव वसुधैव-कुटुंबकम का विचार लेकर कार्य करता है। संघ सकारात्मक सोच के साथ चलता है। शताब्दी वर्ष में जिनको विरोधी माना जाता है वो भी संघ से प्रभावित हुए, ऐसा सामने आया है। अभी तक 10 करोड़ से ऊपर परिवारों में चाहे वो किसी भी धर्म, जाति, पंथ के हों, सबसे संपर्क हुआ है। संघ प्रयास करता है कि युवा पीढ़ी अच्छा सोचे, अच्छा बोले एवं अच्छा करे, यही देशभक्ति है। आज युवा पीढ़ी के योगदान के कारण भारत विश्व स्तर पर अग्रणी देशों की आँखों में आँखें डालकर बात कर रहा है। विश्व में भारत की स्वीकार्यता बढ़ रही।।

उन्होंने कहा कि भारत ही एक ऐसा देश है जो विश्व में सुख-शांति की कामना करता है और उसके लिए काम करता है। विदेश के लोग भी कहते हैं कि भारत को समझना है तो हमें स्वामी विवेकानंद जी की दृष्टि से देखना होगा। सबके कल्याण और विश्व शांति के लिए सोचना, यही हमारे ऋषि मुनियों ने सिखाया है। भारत को विश्व गुरु माना गया, क्योंकि भारत ने ज्ञान-विज्ञान दिया।

उन्होंने कहा कि हम सभी भारत मां के पुत्र-पुत्री हैं तो हमारा आपस में संबंध है, इसलिए समस्त भिन्नताओं के बाद भी हम एक हैं। लेकिन आज बहुत सी ताकतें, बहुत से देश भारत को तोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में हमें समझना होगा कि भारत के लिए क्या अच्छा है। उन्होंने कहा कि भारत देश को पुनः विश्वगुरु बनाने में युवाओं को बड़ी भूमिका निभानी है। संघ ने शताब्दी वर्ष में समाज परिवर्तन के लिए पंच परिवर्तन का सूत्र दिया है। पर्यावरण संरक्षण, कुटुंब प्रबोधन, नागरिक कर्तव्यबोध, समाजिक समरसता और स्वदेशी, सकारात्मक परिवर्तन के लिए इन पांच सूत्रों को समस्त समाज तक पहुंचाना है।

संवाद सत्र के दौरान रामलाल जी ने युवाओं की जिज्ञासाओं का समाधान भी किया। कार्यक्रम अध्यक्ष युवा उद्यमी समीक्षक रामानी ने भी अपने विचार कार्यक्रम का समापन वन्देमातरम के साथ हुआ। संवाद कार्यक्रम में युवा व्यवसायी, डॉक्टर, वकील, उद्यमी, चार्टड एकाउंटेंट, इंजीनियर सम्मिलित हुए।

 

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