अखिल भारतीय साहित्य परिषद् के अ.भा. महामंत्री पवनपुत्र बादल ने कहा कि साहित्य परिक्रमा का यह कलेवर हमारी परंपरा को आधुनिक संदर्भों के साथ जोड़कर युवाओं को नई दृष्टि प्रदान करेगा।
नई दिल्ली, 25 अगस्त 2026। इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती द्वारा आयोजित कार्यक्रम में ‘साहित्य परिक्रमा’ पत्रिका के नूतन कलेवर का विमोचन, ‘विभाजन की विभीषिका’ नाट्य मंचन एवं कार्यकारिणी की घोषणा की गई। कार्यक्रम का शुभारम्भ सरस्वती वंदना एवं साहित्य भारती के उद्देश्य गीत लोकमंगल की कामना के गायन से हुआ। प्रबन्ध सम्पादक डॉ. रजनी ने ‘साहित्य परिक्रमा’ का परिचय दिया और बताया कि पत्रिका अब नूतन कलेवर में ग्वालियर की बजाय दिल्ली से प्रकाशित होगी।
पत्रिका के कुछ पूर्ववर्ती स्तंभों को नए नाम और नए स्वरूप में प्रस्तुत किया गया है। विषयवस्तु को अधिक विविध, समृद्ध और समकालीन बनाने के लिए ‘कलालोक’ और ‘लोकालोक’, ‘भाषा सुभाषा’ आदि स्तम्भ शामिल किए हैं। इस नवीन अंक में ‘वंदे मातरम्’ के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक और राष्ट्रीय संदर्भों को सामने लाने का प्रयास किया गया है।
इस अवसर पर अखिल भारतीय साहित्य परिषद् के अ.भा. अध्यक्ष सुशील चंद्र त्रिवेदी ने कहा कि हम सब मिलकर एक मन से साहित्य जगत में भारतीय विचार को व्यापक वर्ग तक पहुंचाने का कार्य करें, जिससे साहित्य के सर्वहित का संदेश पूरे विश्व में पहुंच सके।
अखिल भारतीय साहित्य परिषद् के अ.भा. महामंत्री पवनपुत्र बादल ने कहा कि साहित्य परिक्रमा का यह कलेवर हमारी परंपरा को आधुनिक संदर्भों के साथ जोड़कर युवाओं को नई दृष्टि प्रदान करेगा।
साहित्य परिक्रमा की दृष्टि में भारत की सभी भाषाएं, राष्ट्रभाषाएं और सभी का सम्मान हमारा कर्तव्य है। ‘साहित्य परिक्रमा’ हिंदी में प्रकाशित होने के बावजूद उसकी दृष्टि सभी भारतीय भाषाओं तक है। इसी भावना से पत्रिका में एक नया स्तंभ ‘भाषा सुभाषा’ प्रारंभ किया गया है। इस स्तंभ के माध्यम से साहित्य परिक्रमा का उद्देश्य भारतीय भाषाओं का संवर्धन करना है। इस स्तंभ के अंतर्गत हिंदी के अतिरिक्त भारतीय भाषा, उसी भाषा की मूल लिपि के साथ प्रकाशित की जाएगी। इस अभिनव पहल का शुभारंभ इस बार तमिल भाषा से किया गया है।
कार्यक्रम में अखिल भारतीय साहित्य परिषद् के अ.भा. अध्यक्ष सुशील चंद्र त्रिवेदी ने इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती की नवीन कार्यकारिणी की घोषणा की। वरिष्ठ साहित्यकार रामशरण गौड़ संरक्षक, विनोद बब्बर को अध्यक्ष, पूनम माटिया को उपाध्यक्ष, मनोज शर्मा को महामंत्री एवं मुन्ना रजक को कोषाध्यक्ष का दायित्व दिया गया है। ममता वालिया साहित्य परिक्रमा पत्रिका प्रमुख, मलखान सिंह लोक साहित्य प्रमुख, राकेश कुमार बाल साहित्य प्रमुख, सारिका कालरा युवा आयाम प्रमुख, दिनेश वत्स प्रचार प्रमुख और जगदीश सिंह एवं सुनीता बुग्गा सदस्य नियुक्त किए गए।
इसके साथ ही, इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती के अध्यक्ष विनोद बब्बर ने दिल्ली में दस केंद्रों पर साहित्यिक गतिविधियों के सुचारू संचालन के लिए संयोजक एवं सह संयोजकों की घोषणा की।
कार्यक्रम के अंत में अदिति महाविद्यालय की छात्राओं ने ‘विभाजन की विभीषिका’ नाटक का मंचन किया। नाटक के माध्यम से भारत विभाजन की त्रासदी को संवेदनाओं और स्मृतियों से प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। विभाजन केवल भौगोलिक सीमा का विभाजन मात्र नहीं था, बल्कि उसने असंख्य परिवारों को एक-दूसरे से अलग कर उनको गहरा आघात पहुंचाया। नाट्य प्रस्तुति में हिन्दू परिवारों की पीड़ा को सामने लाया गया, जिन्हें अपना घर, अपनी गली, अपना गांव, अपनी मिट्टी और अपने प्रियजनों को छोड़कर अनजान स्थानों पर जाना पड़ा। प्रस्तुति का सबसे मार्मिक पक्ष यह रहा कि विस्थापन के बावजूद अपनी जन्मभूमि से जुड़ी भावनाएं और स्मृतियां उनके हृदय में अमिट बनी हुई हैं।

IVSK




