Latest News

विकसित भारत का निर्माण केवल आर्थिक समृद्धि से नहीं, बल्कि संस्कारित, चरित्रवान और उत्तरदायी नागरिकों के निर्माण से होगा – दत्तात्रेय होसबाले जी

IVSK

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने कहा कि ज्ञान, कौशल और चरित्र तीनों का समन्वय शिक्षा है। विकसित भारत की कल्पना में हमें धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष, सभी के विकास के लिए विद्यार्थी तैयार करना है।

मुंबई, 1 अगस्त 2026। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास एवं मुंबई विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में विकसित भारत हेतु शिक्षा विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने कहा कि ज्ञान, कौशल और चरित्र तीनों का समन्वय शिक्षा है। विकसित भारत की कल्पना में हमें धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष, सभी के विकास के लिए विद्यार्थी तैयार करना है।

उन्होंने कहा कि आज जिन संस्थाओं ने प्रस्तुतियां दी हैं, वे समाज और शिक्षण संस्था के समन्वय का अच्छा उदाहरण हैं। आज संवादहीनता हो गई है, संवाद को हमें पुनः स्थापित करना है। हमने जो सीखा है, जैसे सीखा है, वैसे आज की पीढ़ी को नहीं सिखा सकते, उनके अनुसार हमें पद्धति निर्माण करनी होगी। राधाकृष्ण आयोग की रिपोर्ट के अंत में लिखा गया है कि हम एक फैक्ट्री नहीं बना रहे, हम एक सभ्यता बना रहे हैं, इसलिए अपने देश की सभ्यता के नाते हमें मानव और उससे जुड़े सभी पहलुओं पर कार्य करने की आवश्यकता है। विकसित भारत 2047 एक पड़ाव है, उसके बाद यात्रा रुक जाएगी, ऐसा नहीं है। हर नीति काल विशेष के लिए होती है, हमें अपने मूल को नहीं छोड़ना है तथा आवश्यकता अनुसार उसमें बदलाव करना है।

उन्होंने कहा कि विकसित भारत का निर्माण केवल आर्थिक समृद्धि से नहीं, बल्कि संस्कारित, चरित्रवान, आत्मविश्वासी और उत्तरदायी नागरिकों के निर्माण से होगा। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक विज्ञान के समन्वय पर आधारित शिक्षा व्यवस्था को समय की आवश्यकता बताते हुए शिक्षा, उद्योग, शासन और समाज के सभी घटकों से विकसित भारत-2047 के राष्ट्रीय संकल्प की सिद्धि के लिए मिलकर कार्य करने का आह्वान किया।

संगोष्ठी में देशभर के शिक्षाविदों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, नीति-निर्माताओं, विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपतियों, तकनीकी संस्थानों के निदेशकों, राज्यों के शिक्षा एवं कौशल विकास मंत्रियों तथा सामाजिक क्षेत्र के प्रबुद्धजनों ने सहभागिता कर विकसित भारत-2047 के निर्माण में शिक्षा की भूमिका पर व्यापक विचार-विमर्श किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया। स्वागत उद्बोधन डॉ. पंकज मित्तल, अध्यक्ष शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास ने दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 भारतीय शिक्षा को वैश्विक नेतृत्व प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है और उसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी हितधारकों की सहभागिता आवश्यक है।

Related Posts you may like

इंद्रप्रस्थ संवाद - नवीन अंक