श्रद्धेय अशोक सिंहल जन्मशताब्दी वर्ष का शुभारंभ, गौ-विज्ञान अनुसंधान केंद्र में पांच प्रकल्पों का लोकार्पण और दो की घोषणा- डॉ. मोहन भागवत जी

IVSK

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा की गौमाता केवल श्रद्धा का विषय नहीं, बल्कि हमारे ग्रामजीवन, कृषि, पर्यावरण और अर्थव्यवस्था से जुड़ी जीवन व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। गौवंश का संरक्षण केवल आश्रय देकर नहीं, बल्कि उन्हें समाजजीवन में उपयोगी और सम्मानजनक स्थान देकर किया जाना चाहिए।

नागपुर, 7 अक्तूबर 2026। श्रद्धेय अशोक सिंहल जन्मशताब्दी वर्ष के शुभारंभ अवसर पर गौ-विज्ञान अनुसंधान केंद्र, गौ-तीर्थ, देवलापार में पांच नए प्रकल्पों का लोकार्पण एवं दो महत्वपूर्ण प्रकल्पों की घोषणा की गई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी के करकमलों से कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ।

इस अवसर पर आर.सी. प्लास्टो के सीएसआर सहयोग से स्थापित ऑर्गेनिक मैन्युअर यूनिट, देशी गौवंश की नस्ल सुधार एवं संवर्धन के लिए आईवीएफ यूनिट, रामदेव बाबा यूनिवर्सिटी, नागपुर के सहयोग से निर्मित बैलचालित विद्युत उत्पादन यूनिट तथा ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा देने वाले रानी दुर्गावती ग्रामीण हाट का लोकार्पण किया गया। साथ ही पंचगव्य कैंसर वेलनेस सेंटर और गौविद्यापीठ, इन दो महत्वपूर्ण प्रकल्पों की घोषणा की गई।

गौसेवा के कार्य की सराहना की

इस अवसर पर सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने गौसेवा के कार्य को केवल भावना तक सीमित न रखते हुए गौवंश को कृषि, ऊर्जा, जैविक खाद और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। गौ-विज्ञान अनुसंधान केंद्र द्वारा परंपरा और विज्ञान के समन्वय से किए जा रहे विभिन्न प्रकल्प समाज के लिए उपयोगी एवं दिशादर्शक हैं। उन्होंने गौसेवा के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि गौमाता केवल श्रद्धा का विषय नहीं, बल्कि हमारे ग्रामजीवन, कृषि, पर्यावरण और अर्थव्यवस्था से जुड़ी जीवन व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। गौवंश का संरक्षण केवल आश्रय देकर नहीं, बल्कि उन्हें समाजजीवन में उपयोगी और सम्मानजनक स्थान देकर किया जाना चाहिए।

श्रद्धेय अशोक सिंहल जी के जन्मशताब्दी वर्ष का यह समारोह उनके गौसेवा, गौरक्षा और राष्ट्रसेवा को समर्पित जीवनकार्य को नमन करने वाला रहा। श्री राम जन्मभूमि आंदोलन में उनके महत्वपूर्ण योगदान का भी स्मरण किया गया। कार्यक्रम में विश्व हिन्दू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार जी सहित अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।

गौ-विज्ञान अनुसंधान केंद्र के अध्यक्ष पदमेश गुप्ता ने केंद्र की 30 वर्षों की कार्ययात्रा का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि गौसेवा, गौरक्षा, गौ-आधारित कृषि और ग्राम विकास को विज्ञान से जोड़कर केंद्र के कार्य को आगे बढ़ाना ही श्रद्धेय अशोक सिंहल जी के विचारों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है। नंदी के संरक्षण पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि नंदी को केवल गौशाला में आश्रय देने के बजाय उन्हें ग्रामीण जीवन और अर्थव्यवस्था में पुनः उपयोगी बनाना आवश्यक है। बैलचालित ऊर्जा परियोजना के माध्यम से चक्की, कोल्हू और अन्य ग्रामीण उपकरण चलाकर नंदी के उपयोग से उनके संरक्षण के लिए टिकाऊ आर्थिक आधार तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने पंचगव्य अनुसंधान, गौ-आधारित उत्पाद, रानी दुर्गावती ग्रामीण हाट, जनजातीय क्षेत्र के 141 गांवों में किए जा रहे कार्य, गौविद्यापीठ, आईवीएफ और जैविक खाद परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए ‘गौनॉमिक्स’ के माध्यम से गौ-आधारित स्थानीय एवं टिकाऊ अर्थव्यवस्था के निर्माण का संकल्प व्यक्त किया।

समारोह परंपरा को विज्ञान से जोड़ते हुए गौवंश के माध्यम से समाज और राष्ट्र की आत्मनिर्भरता को नई दिशा देने का संकल्प और अधिक दृढ़ करने वाला रहा।

 

Related Posts you may like

इंद्रप्रस्थ संवाद - नवीन अंक