भगवत गीता यानी भगवान द्वारा गाया गीत

सीमा ओझा

भगवत गीता को निजी स्वार्थ से प्रेरित हुए बिना यदि कोई समझता है तो वह समस्त शास्त्रों के अध्ययन को पीछे छोड़ देता है। भगवत गीता में जो बताते हैं वह कहीं भी अन्यत्र उपलब्ध नहीं है। यही गीता का वैशिष्ट्य है। गीता के दर्शन कि प्रस्तुति वैदिक युग से पवित्र कुरुक्षेत्र के युद्ध स्थल से हुई भगवान द्वारा भगवत गीता का प्रवचन तब किया गया जब वह इस लोक में उपस्थित थे। बहुजन हिताय बहुजन सुखाय को चरितार्थ करती गीता ही एक ऐसा ग्रन्थ है जिसकी जयंती मनाई जाती है।

दीपावली का त्यौहार संपन्न, अब हवा में अगहन मास की बयार, शीत ऋतु की आहट और हिंदुओं के मुख्य धर्म ग्रंथ भगवत गीता की जयंती।

इस जयंती के संबंध में यह प्रचलित है कि इसी दिन कुरुक्षेत्र के मैदान में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था। 3 दिसंबर 2022 को पड़ने वाली यह जयंती गीता की 5159 वी वर्षगांठ है। सनातन धर्म के लोग इस जयंती को एक पर्व की तरह मनाते हैं। इस दिन हरियाणा के कुरुक्षेत्र नामक स्थान पर मेला भी लगता है। आइये अब जानते है की हमारा यह महान ग्रंथ क्यों इतना महत्वपूर्ण है कि संत ज्ञानेश्वर, लोकमान्य तिलक, राधाकृष्णन व कई विद्वजनो ने इस पर टिका लिखी।

संस्कृत में लिखे इस ग्रंथ के 18 अध्याय का साक्षी कुरुक्षेत्र का मैदान है, जहां सबसे बड़े धर्म युद्ध की रणभूमि में श्रीकृष्ण ने अर्जुन को उपदेश दिया। गीता के 700 श्लोक धर्म, शक्ति, कर्म, सांख्य, ध्यान, त्याग, क्रिया, ज्ञान, आत्मा के विशिष्ट योग व मुक्ति की संपूर्ण व्याख्या करते हैं। जब जीवन मूल्यों का हास्य अपने चरम पर था तब मनुष्य जाति के कल्याण के लिए श्रीकृष्ण ने गीता के उपदेश कहे। यह ग्रन्थ ईश्वर द्वारा प्रदत्त जनकल्याण की एक धरोहर है।

गीता में श्रीकृष्ण अर्जुन को यह बताते हैं कि मैं ही हूं जो सृष्टि के आदि से अंत तक सदा रहूंगा। सभी जीव मुझ में है और मैं सभी जीवो में हूं। सभी इंद्रियों द्वारा जैसे सूंघना, चखना, देखना, स्पर्श यह सब मेरे द्वारा ही है। सर्वव्यापी ईश्वर पग-पग पर आत्मा की मीमांसा करते हैं। यह पुस्तक पूजा पद्धति नहीं बताती अपितु आपके चित में समाने वाली अद्भुत दर्शन है।

गीता न केवल आपको सफलता, अपितु जीवन में सकारात्मकता, व्यक्तित्व निर्माण, मेहनत, सही समय पर निर्णय लेने की क्षमता, स्वयं का अस्तित्व, जीवन जीने का सलीका से लेकर आहार विहार के उचित अनुचित का भेद भी बताती है।

यह ब्रह्मांड कैसे बना क्या सच में ईश्वर है? अगर है तो कहां है? पुनर्जन्म की अवधारणा हो या मृत्यु के उपरांत हमारे साथ क्या होता है? सब समाहित है इस धर्म ग्रंथ में।

आखिर क्या है इस भगवत गीता में तो जानते हैं भगवत गीता का अर्थ। भगवत का अर्थ होता है भगवान व गीता का मतलब गीत एक ऐसा गीत जिसे स्वयं भगवान ने गाया हो।

हमारे कर्म में बाधा क्या है? मोह से हम कैसे बच सकते हैं? गीता का दूसरा अध्याय बताता है की भावना पर नियंत्रण, आत्मा, मृत्यु, पुनर्जन्म, निर्णय लेने की क्षमता व क्रोध का मूल क्या है। गीता के दूसरे अध्याय में ही श्रीकृष्ण अर्जुन को चेतावनी देते हुए कहते हैं कि या तो युद्ध में मारे जाकर स्वर्ग को प्राप्त होगे अथवा जीतकर पृथ्वी के राज्य को भागोगे। तुम निश्चित करके युद्ध करने के लिए खड़े हो जाओ। इसे वर्तमान संदर्भ में इस आशय से जोड़ सकते हैं कि हम जो भी काम करें जी जान से करें।

आपकी सफलता में आपकी शिक्षा, आपकी मेहनत, आपकी ईमानदारी और योग इन सब का साथ लेकर आगे बढ़ना होगा। कर्म करने और केवल परमात्मा में भरोसा रखने का संदेश देने वाली गीता व्यक्ति को श्रद्धा व समर्पण सिखाती है। यह उद्धार का सुगम उपाय है। महाभारत के समय में युद्धरत सभी है पर संशय केवल और केवल अर्जुन को है वह श्रीकृष्ण के स्नेही भी है। अर्जुन कहते हैं कि कुल धर्म तो सनातन है युद्ध से सनातन धर्म का लोप होगा, वर्णसंकर पैदा होंगे। इस पर श्रीकृष्ण कहते हैं अर्जुन यहां तुम्हें अज्ञान क्यों हो गया सन्मार्ग पर जो दृढनतापूर्वक चलता है वही योधा है।

भगवत गीता में ईश्वर, जीव, प्रकृति, काल तथा कर्म इन सब की व्याख्या हुई है। 18 अध्याय में वर्णित गीता 17 अध्याय तक संपूर्ण हो जाती है। 18 अध्याय सारे उपदेश का सारांश है। भागवत गीता बताती है कि कृष्ण की शरणागति सर्वसिद्धि है। वास्तविक सत्य भगवान कृष्ण है। सारांश यह है कि भगवत गीता दिव्य साहित्य है जिसको ध्यान पूर्वक पढ़ना चाहिए।

यदि कोई भगवत गीता को निष्ठा तथा गंभीरता के साथ पढ़ता है तो भगवान की कृपा से उसके सारे पूर्व दुष्कर्मों के फलों का प्रभाव नहीं पड़ता है।

भगवत गीता को निजी स्वार्थ से प्रेरित हुए बिना यदि कोई समझता है तो वह समस्त शास्त्रों के अध्ययन को पीछे छोड़ देता है। भगवत गीता में जो बताते हैं वह कहीं भी अन्यत्र उपलब्ध नहीं है। यही गीता का वैशिष्ट्य है। गीता के दर्शन कि प्रस्तुति वैदिक युग से पवित्र कुरुक्षेत्र के युद्ध स्थल से हुई भगवान द्वारा भगवत गीता का प्रवचन तब किया गया जब वह इस लोक में उपस्थित थे। बहुजन हिताय बहुजन सुखाय को चरितार्थ करती गीता ही एक ऐसा ग्रन्थ है जिसकी जयंती मनाई जाती है।

 

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