अखिल भारतीय शारीरिक शिक्षण प्रमुख मनीषा जी ने कहा कि हमें नवोत्थान करना है। भारत को यहां की जीवन दृष्टि के आधार पर भारत ही बनाना है, India नहीं। भारत के ‘स्व’ तंत्र के आधार पर, भारत के अपने विचार, अपनी संस्कृति के आधार पर भारत को विकसित भारत, विश्वगुरु भारत बनाना है।
जबलपुर, 26 मई 2026। सिवनी में आयोजित राष्ट्र सेविका समिति के 15 दिवसीय प्रवेश शिक्षा वर्ग के समापन समारोह में शिक्षार्थियों ने कबीर के दोहे के साथ योगासन, दंड, यष्टि, नियुद्ध, गणसमता, योगचाप, और घोष पर विभिन्न रचनाओं का वादन किया।
समापन समारोह में मुख्य वक्ता राष्ट्र सेविका समिति की अखिल भारतीय शारीरिक शिक्षण प्रमुख मनीषा संत ने समिति की स्थापना, कार्य व उद्देश्य के बारे में जानकारी दी। मनीषा जी ने कहा अपना इतिहास साक्षी है, भारत प्रारंभ से एक राष्ट्र रहा है। भले ही राज्य अलग होंगे, राज्य के अपने नीति नियम होंगे। लेकिन हमारी समान भूमि, समान इतिहास, समान मान्यता, समान परंपरा, समान संस्कृति रही है और इसीलिये हम अपने ध्येय में हिन्दू राष्ट्र का पुनर्निर्माण, ऐसा कहते हैं।
इसका अर्थ यही है कि पहले ही यह एक तेजस्वी हिन्दू राष्ट्र था। कालान्तर में परिस्थिति बदली, मूल्यों का पतन हुआ, अब अपने राष्ट्र को पुनः तेजस्वी बनाना है, विकसित बनाना है, परम वैभव संपन्न बनाना है, विश्वगुरु भारत बनाना है। उन्होंने कहा कि हमें नवोत्थान करना है। भारत को यहां की जीवन दृष्टि के आधार पर भारत ही बनाना है, India नहीं। भारत के ‘स्व’ तंत्र के आधार पर, भारत के अपने विचार, अपनी संस्कृति के आधार पर भारत को विकसित भारत, विश्वगुरु भारत बनाना है।
उन्होंने कहा कि अपने यहां व्यक्तिगत जीवन कैसे होना है, इसका उत्तम मार्गदर्शन हमारे पूर्वजों ने दिया है। जीवन कैसे जीना है? मूल्याधारित जीवनशैली को अपनाकर चलना है। अपने हिन्दुत्व में एक जीवन दर्शन है, जीवन दृष्टि है, जीवनमूल्य है और जीवन व्यवहार है। यह सब हमें अपने विचारों में, आचरण में, कृति में लाना है।
मुख्य अतिथि सहायक संचालक उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग डॉ. आशा उपवंशी ने कहा कि हम सभी सेविकाओं को जागृत रहकर परिवार, समाज और राष्ट्र का संरक्षण करना है। अपनी संस्कृति को बचाकर रखना है।
प्रवेश वर्ग की वर्गाधिकारी शिखा राय ने वर्ग की जानकारी दी। वर्ग में महाकौशल प्रान्त के 9 विभागों के 22 जिलों से 101 शिक्षार्थियों ने भाग लिया।

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