राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कुटुम्ब प्रबोधन संयोजक रवीन्द्र शंकर जोशी जी ने कहा कि सन्त शिरोमणि गुरु रविदास सामाजिक समरसता के मूर्तिमान स्वरूप रहे। ”हरि को भजे सो हरि का होय”, यह पंक्ति इस तथ्य को बल प्रदान करती है कि ईश्वर के प्रति समर्पण भाव रखने से ईश्वर की कृपा समान रूप से प्राप्त होती है। इसमें जाति की श्रेष्ठता का कोई महत्व नहीं रहता।
काशी, 13 जुलाई 2026। सीरगोवर्धनपुर स्थित संत गुरु श्री रविदास जन्मस्थली पर पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र कुटुंब प्रबोधन के रामलला गट ने सद्गुरु पूजनोत्सव एवं महन्त भारत भूषण जी का सम्मान समारोह आयोजित किया।
समारोह में उपस्थित श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कुटुम्ब प्रबोधन संयोजक रवीन्द्र शंकर जोशी जी ने कहा कि सन्त शिरोमणि गुरु रविदास सामाजिक समरसता के मूर्तिमान स्वरूप रहे। ”हरि को भजे सो हरि का होय”, यह पंक्ति इस तथ्य को बल प्रदान करती है कि ईश्वर के प्रति समर्पण भाव रखने से ईश्वर की कृपा समान रूप से प्राप्त होती है। इसमें जाति की श्रेष्ठता का कोई महत्व नहीं रहता।
उन्होंने कहा कि सन्त गुरु रविदास ने स्वयं यह स्वीकार किया है कि राम की कृपा से सब सम्भव होगा, यह श्रद्धा हममें होनी चाहिए। मनुष्य के आध्यात्मिक विकास में सबसे बड़ा शत्रु अहंकार है।
सद्गुरु पूजनोत्सव कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कैलाशमठ के महामण्डलेश्वर स्वामी आशुतोषानन्द गिरी जी महाराज ने कहा कि भारतीय साहित्य में भेद करने का कोई भी उपक्रम वर्णित नहीं है। जिस समुदाय ने गुलामी के काल में अपने धर्म का त्याग न करके सिर पर मैला ढोना स्वीकार किया, उसे गले लगाया जाना चाहिए।
सन्त गुरु रविदास मन्दिर के महन्त भारत भूषण जी महाराज ने कहा कि जो भी व्यक्ति श्रेष्ठ कार्य में लगा हुआ है, उन सबके प्रति अपनत्व व प्रेम का भाव रखना आवश्यक है। संसार के सभी मत भोगवादी हैं। एकमात्र सनातन परम्परा ही अध्यात्म युक्त जीवन जीना सीखाती है। संसार में तेरा मेरा का भाव समाप्त होने पर ही समरसता बढ़ेगी। जैसे मधुमक्खी छत्ते के शहद से मिठास प्राप्त करती है। वैसे ही मनुष्य सत्संग से आनन्द प्राप्त करता है।
कार्यक्रम के प्रारम्भ में अतिथियों ने संत गुरु श्रीरविदास की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। तत्पश्चात महंत श्री भारत भूषण जी को अंगवस्त्र एवं स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण प्रख्यात संगीतकार देवव्रत मिश्र द्वारा संत शिरोमणि रविदास जी के भजनों की प्रस्तुति रही। उनके शिष्य अनुराग ने ”आज दिवस लेउ बलिहारा, मेरे गृह आए राजा राम जी प्यारा” एवं ”को बंजारो राम को, मेरा टाण्डा लादिया जाए रे” सहित अन्य भजनों की सुमधुर प्रस्तुति दी।
कार्यक्रम का संचालन काशी प्रान्त के प्रान्त कुटुम्ब प्रबोधन संयोजक डॉ. शुकदेव जी ने किया।

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