अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख प्रदीप जोशी जी ने कहा कि भारत को कमजोर करने की साजिश करने वाली शक्तियां विभिन्न प्रकार के नए षड्यंत्र रचने में लगी हैं। इन शत्रुओं की पहचान कर उन्हें परास्त करना हमारी जिम्मेदारी है।
भुवनेश्वर, 6 मई 2026। विश्व संवाद केंद्र द्वारा आयोजित नारद जयंती कार्यक्रम और नारद सम्मान समारोह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख प्रदीप जोशी जी ने कहा कि भारत को कमजोर करने की साजिश करने वाली शक्तियां विभिन्न प्रकार के नए षड्यंत्र रचने में लगी हैं। इन शत्रुओं की पहचान कर उन्हें परास्त करना हमारी जिम्मेदारी है। नारद जी ने जिस प्रकार हमेशा स्वकालीन धर्म का पालन किया, हमें भी उनसे सीख लेकर उसी तरह धर्म की पुनः स्थापना करनी होगी। नई पीढ़ी को इसके लिए तैयार करना होगा, जिससे वे हमेशा देशहित में खड़े रहें।
जयदेव भवन में आयोजित कार्यक्रम में राज्य के संस्कृति, खेल एवं युवा मामलों के मंत्री सूर्यवंशी सूरज की उपस्थिति में वरिष्ठ पत्रकार प्रसन्न पति को जीवनव्यापी साधना के लिए नारद सम्मान से सम्मानित किया गया।
प्रदीप जोशी जी ने कहा कि नारद संवाद के आदर्श हैं। भारत की दृष्टि, विचार और स्वभाव के पुनर्जागरण के लिए नारद जी का स्मरण आवश्यक है। नारद सभी का कल्याण चाहने वाले थे; वे सर्वव्यापी, सर्वस्पर्शी और सार्वभौमिक थे।
उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता भारत का मूल आधार है और यही इसकी विशेषता है। यही कारण है कि भारतीय चिंतन पूरे विश्व का कल्याण चाहता है और पूरे विश्व को परिवार मानता है। इसी धारा को आगे बढ़ाने के लिए आद्य शंकराचार्य से लेकर अनेक संत महात्मा आगे आए। इस धारा को आगे बढ़ाना हमारी जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि पिछले एक से डेढ़ सौ वर्षों में भारत में एक धारा दिखाई दे रही है जो विदेशी विचारों से संचालित हो रही है। उन्होंने 1905 में बंग भंग, 1906 में मुस्लिम लीग की स्थापना, खिलाफत आंदोलन और वंदे मातरम को छोटा करने का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि हमारे आस्था के केंद्रों पर लगातार हमले हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि दूसरी ओर एक धारा है जो राष्ट्रत्व की भावना को प्रखर करने का प्रयास कर रही है। हिन्दुत्व और राष्ट्रत्व की भावना समाज में अपनापन पैदा करती है। इसी विचार को समाज में और फैलाने की जरूरत है।
उन्होंने चेतावनी दी कि भारत को कमजोर करने के लिए विदेशों से सुनियोजित तरीके से षड्यंत्र किए जा रहे हैं। उदाहरण देते हुए बताया कि हाल ही में अमेरिकी विश्वविद्यालयों ने “डिसमेंटलिंग ग्लोबल हिन्दुत्व” विषय पर कार्यक्रम आयोजित हुआ था। भारत को कमजोर करने वाली शक्तियाँ अब विभिन्न तरीकों से अपने कार्यों को अंजाम देने का प्रयास कर रही हैं। इसके लिए आक्रमणकारियों का महिमामंडन कर रहे हैं, जिसे “ग्लोरिफिकेशन ऑफ द आड” कहा जाता है। यह सुनियोजित तरीके से किया जा रहा है, और भारत पर आक्रमण करने वाले आक्रांताओं को महान बताने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रदीप जोशी जी ने कहा कि ये शक्तियाँ “डिआईकोनाइजेशन ऑफ इंडियन आइकन” का कार्य भी कर रही हैं। भारत के नायकों को खलनायकों के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया जा रहा है। यह कार्य पहले भी होता रहा है; उदाहरण के लिए, नेताजी सुभाष चंद्र बोस को “तोजो का कुत्ता” कहकर संबोधित किया गया था, और स्वामी विवेकानंद के बारे में भी मिथ्य़ा प्रचार किया गया।
उन्होंने जापान, जर्मनी, और इस्राइल का उदाहरण देते हुए कहा कि इन देशों ने अपने दृढ़ निश्चय के बल पर आगे बढ़ने में सफलता पाई। इन देशों के लोगों के बीच भी मतभेद होते हैं, लेकिन जब राष्ट्र की बात आती है, तो वे राष्ट्र को पहले रखते हैं। यदि ये देश ऐसा कर सकते हैं, तो भारत क्यों नहीं कर सकता?
कार्यक्रम में उच्च शिक्षा, युवा और खेल मामलों तथा संस्कृति मंत्री सूर्यवंशी सूरज ने कहा कि नारद जी के पास वाणी और बीणा का अद्भुत समन्वय था। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का धर्म देवर्षि नारद से सीखना चाहिए, क्योंकि वे लोक कल्याण के लिए कार्य करते थे। पत्रकारों से आग्रह किया कि वे जो देखें उसकी जांच कर सच्चाई को निर्भीकता के साथ लिखें। लेकिन, कुछ लोग एजेंडा आधारित पत्रकारिता कर रहे हैं, जिसका विरोध होना चाहिए।

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