अशोक सिंहल फाउण्डेशन द्वारा आयोजित निःशुल्क अंग प्रत्यारोपण शिविर के पांचवें दिन शिविर में कुल 20 को हाथ व 35 लाभार्थियों को कैलिपर, 170 लाभार्थियों को कृत्रिम अंग व आवश्यक उपकरण दिए गए। कुल 700 लोगों का नेत्र परीक्षण करने के बाद 569 लोगों को चश्मों का वितरण किया गया।
अयोध्या, 1 अक्तूबर 2026। विश्व हिन्दू परिषद के केंद्रीय उपाध्यक्ष एवं अशोक सिंहल फाउण्डेशन से न्यासी चम्पत राय ने कहा कि श्रद्धेय अशोक जी के प्रति आदर और समर्पण रखने वाले जिस परिवार ने यह ट्रस्ट “अशोक सिंहल फाउंडेशन” बनाया है। यहां के समस्त व्यय केवल उसी एक परिवार का दायित्व है। उन्होंने अपने ऊपर यह दायित्व सहज रूप से स्वीकार भी किया है। वह अपने व्यापारिक लाभांश का उपयोग यहां के समस्त व्यय पर करते हैं। यह बात ध्यान रखने की है कि समाज से इसके लिए कोई अतिरिक्त धन एकत्र नहीं किया जाता है।
उन्होंने अशोक जी के विषय में बताया कि दिल्ली में एक व्यापारिक परिवार है जो उद्योग चलाते हैं। अशोक जी के प्रति उनकी बड़ी श्रद्धा है। उस परिवार ने ही श्रद्धा रखने के कारण अशोक जी के लिए एक ट्रस्ट बनाया “अशोक सिंहल फाउंडेशन”। अशोक जी की बड़ी जीवनी उन्होंने छापी है, हिंदी और अंग्रेजी में। आज जो एक छोटी पुस्तक भेंट की जा रही है, वह भी उन्हीं के द्वारा तैयार की गई है। इस साल उन्होंने अशोक जी के जीवन पर एक 20-25 मिनट की फिल्म भी तैयार की है। काफी स्थलों पर देशभर में वह दिखाई जा रही है। यह साल अशोक जी का जन्मशताब्दी वर्ष भी है। 1926 में 27 सितंबर को उनका जन्म हुआ था, यह 2026 है। सारे देश में लगभग 1000 स्थानों पर जन्मशताब्दी के आयोजन होने की संभावना है, यानी प्रत्येक जिला केंद्र पर। मैं स्वयं अभी कानपुर में उनकी जन्मशताब्दी के कार्यक्रम से आ रहा हूं।
अशोक जी का जीवन हिन्दू संस्कृति के उत्थान और सम्मान के लिए था। लगभग 90 वर्ष की आयु तक वे जीवित रहे, और नवंबर 2015 में उनका शरीर शांत हुआ।
हरिधाम के रामानन्दी संप्रदाय के जगद्गुरु रामदिनेशाचार्य जी ने कहा कि निश्चित रूप से अशोक सिंहल जी का योगदान भारतीय संस्कृति और परंपरा के लिए अक्षुण्ण है। एक महापुरुष जो संत के रूप में पूरा जीवन भगवान श्रीराम के मंदिर के लिए और नर सेवा, नारायण सेवा के लिए समय समर्पित कर दिया। सारे भारत के संतों को एक साथ उपस्थित करके वह किसी भी संप्रदाय के हों, यह बहुत बड़ी बात थी कि सारे मत-पंथों के लोगों को एक मंच पर लाकर श्री राम जन्मभूमि मंदिर आंदोलन के लिए खड़ा करना। यह अप्रतिम काम यदि किसी ने किया है तो श्रद्धेय अशोक सिंहल जी ने किया है। असक्तजनों, दिव्यांगजनों के चेहरे पर प्रसन्नता लाना, मुझे लगता है इससे बड़ी श्रद्धांजलि अशोक जी के लिए नहीं हो सकती है। मुझे लगता है अशोक सिंहल जी भी इस कार्य से आनंदित होते होंगे।
मुख्य अतिथि राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य और दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री सत्येन्द्र बारी ने कहा कि कृत्रिम अंग लगने से केवल पीड़ित व्यक्ति ही नहीं, उसका पूरा परिवार, सारे सपने और आत्मविश्वास भी चल पड़ता है।
मणिरामदास छावनी के महंत कमलनयन दास जी, डॉ. राकेश शास्त्री, मंगल भवन के महंत कृपाल भूषण जी महाराज, जिला विकलांग कल्याण अधिकारी चंद्रेश त्रिपाठी ने भी शिविर का निरीक्षण कर आशीर्वचन दिया। पूर्व सांसद लल्लू सिंह ने भी अशोक जी और भारत माता के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। देर शाम जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी ने भी शिविर का निरीक्षण किया।
170 को मिले कृत्रिम अंग
अशोक सिंहल फाउण्डेशन द्वारा आयोजित निःशुल्क अंग प्रत्यारोपण शिविर के पांचवें दिन शिविर में कुल 170 लाभार्थियों को कृत्रिम अंग व आवश्यक उपकरण दिए गए। कुल 569 लोगों को चश्मे वितरित किए गए।
शिविर के पांच दिनों में कुल 115 को कृत्रिम अंग, 20 को हाथ व 35 लाभार्थियों को कैलिपर का वितरण किया गया। इसके अलावा जरूरतमंदों को 25 ह्वीलचेयर, 50 ट्राईसाइकिल, 75 को कान से सुनने की मशीन व 100 लोगों को एक एक जोड़ी बैसाखियां वितरित की गईँ। कुल 700 लोगों का नेत्र परीक्षण करने के बाद 569 लोगों को चश्मों का वितरण किया गया।

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