सन्तों एवं धर्माचार्यों ने स्पष्ट किया कि सनातन धर्म केवल एक धार्मिक परम्परा नहीं, अपितु सम्पूर्ण मानवता को शान्ति, सद्भाव, करुणा और सह-अस्तित्व का सन्देश देने वाली जीवन-पद्धति है। अतः इसके संरक्षण एवं प्रसार के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग को अपनी भूमिका का निर्वहन करना चाहिए।
हरिद्वार, 19 जून 2026। विश्व हिन्दू परिषद के केन्द्रीय मार्गदर्शक मण्डल की उच्चाधिकार समिति की महत्वपूर्ण बैठक धर्मनगरी हरिद्वार के जगदीश स्वरूप आश्रम में सम्पन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामण्डलेश्वर पूज्यपाद अवधेशानन्द गिरि जी महाराज ने की।
बैठक में भारतवर्ष के विविध पीठों, अखाड़ों, सम्प्रदायों एवं आध्यात्मिक परम्पराओं के अनेक शीर्षस्थ एवं शिखरस्थ सन्त-महात्माओं, धर्माचार्यों तथा विश्व हिन्दू परिषद के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने सहभागिता कर राष्ट्र, धर्म, संस्कृति एवं समाज से जुड़े विविध समसामयिक विषयों पर सार्थक चिन्तन-मन्थन किया।
बैठक में उपस्थित संत
बैठक में परमपूज्य महानिर्वाणीपीठाधीश्वर आचार्यमहामण्डलेश्वर पूज्यपाद श्री स्वामी विशोकानन्द भारती जी महाराज, परम पूज्य ज्योतिषपीठाधीश्वर अनंतश्री विभूषित जगद्गुरु शंकराचार्य श्री स्वामी वासुदेवानन्द सरस्वती जी महाराज, परमपूज्य अटल आचार्यमहामण्डलेश्वर पीठाधीश्वर श्री स्वामी विश्वात्मानन्द जी महाराज, परम पूज्य युगपुरुष श्री स्वामी परमानन्द जी महाराज, परमपूज्य निर्मल पीठाधीश्वर श्री स्वामी ज्ञानदेव सिंह जी महाराज, परम वंदनीया पूज्या दीदी माँ साध्वी ऋतंभरा जी, पूज्य श्री युधिष्ठिर जी महाराज (प्रमुख, शदाणी दरबार, हरिद्वार), पूज्य स्वामी श्री जितेन्द्रनाथ जी महाराज (अमरावती, महाराष्ट्र), पूज्य डॉ. चिन्मय पण्ड्या जी (प्रमुख, शान्तिकुञ्ज, हरिद्वार), पूज्या साध्वी पूर्णप्रज्ञा माताजी, परम पूज्य श्री देवलाचार्य-अविचलाचार्य जी महाराज (कर्णावती क्षेत्र, गुजरात), पूज्य स्वामी श्री जितेन्द्रानन्द सरस्वती जी महाराज (राष्ट्रीय महामंत्री, अखिल भारतीय संत समिति), पूज्य डॉ. भदन्त राहुल बोधि जी (मुम्बई), परम् वंदनीया महामण्डलेश्वर पूज्या संतोषी माता जी, श्री पद्मनाभपीठाधीश्वर पूज्य स्वामी ब्रह्मेशानन्द जी महाराज (गोवा), महामण्डलेश्वर पूज्य स्वामी अखिलेश्वरानन्द जी महाराज, ट्रस्टी समन्वय सेवा ट्रस्ट हरिद्वार सहित अन्य प्रतिष्ठित सन्त-महात्मा उपस्थित रहे।
विश्व हिन्दू परिषद् के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार जी, अंतरराष्ट्रीय संरक्षक एवं केन्द्रीय प्रबन्ध समिति के वरिष्ठ सदस्य दिनेश जी; मिलिंद परांडे जी, बजरंग बागड़ा जी, सहित अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी भी बैठक में उपस्थित रहे।
बैठक में हिन्दू समाज के संगठन, सनातन संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन, गौसंरक्षण, धार्मिक स्थलों की सुरक्षा, सेवा कार्यों के विस्तार, सामाजिक समरसता, परिवार प्रबोधन, युवा जागरण, धर्मांतरण की चुनौतियों, राष्ट्रीय एकात्मता तथा विश्वस्तर पर भारतीय आध्यात्मिक मूल्यों के प्रसार जैसे अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। सन्तों एवं धर्माचार्यों ने वर्तमान समय की चुनौतियों का गंभीर विश्लेषण करते हुए समाज को जागरूक, संगठित एवं संस्कारित बनाने के लिए व्यापक जनजागरण की आवश्यकता पर बल दिया।
अवधेशानन्द गिरि जी महाराज ने कहा कि भारत की आत्मा उसकी सनातन संस्कृति में निहित है। जब समाज धर्म, सेवा, संस्कार और समरसता के मार्ग पर अग्रसर होता है, तभी राष्ट्र की वास्तविक उन्नति एवं उत्थान सम्भव होता है। उन्होंने सन्त समाज और सामाजिक संगठनों के समन्वित प्रयासों को समय की आवश्यकता बताते हुए लोकमंगल, राष्ट्रनिर्माण और मानव कल्याण के लिए सतत् कार्य करने का आह्वान किया।
बैठक में उपस्थित सन्तों एवं धर्माचार्यों ने स्पष्ट किया कि सनातन धर्म केवल एक धार्मिक परम्परा नहीं, अपितु सम्पूर्ण मानवता को शान्ति, सद्भाव, करुणा और सह-अस्तित्व का सन्देश देने वाली जीवन-पद्धति है। अतः इसके संरक्षण एवं प्रसार के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग को अपनी भूमिका का निर्वहन करना चाहिए। सभी सन्तों, धर्माचार्यों एवं पदाधिकारियों ने एक स्वर से संकल्प व्यक्त किया कि धर्म, संस्कृति, राष्ट्र और समाज के हित में संयुक्त रूप से कार्य करते हुए भारत को पुनः विश्व के आध्यात्मिक नेतृत्व के शिखर पर प्रतिष्ठित करने के लिए सतत् प्रयास किए जाएंगे।

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