Latest News
इन्द्रप्रस्थ विश्व संवाद केंद्र द्वारा दिल्ली में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान 2026 का भव्य आयोजन    ||     अध्यात्म और विज्ञान में भी समन्वय का कार्य वैज्ञानिकों को करना चाहिए – डॉ. कृष्ण गोपाल जी    ||     दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में 'भाई मनी सिंह स्मृति व्याख्यान' गरिमामय संपन्न; प्रख्यात विद्वानों ने अमर शहीद भाई मनी सिंह जी के ग्रंथात्मक योगदान और अद्वितीय शहादत को किया नमन    ||     "14 जून, 14 घाट" — यमुना सफाई महाअभियान में 14,226 लोगों ने निकाले 71 टन कचरा    ||     भारत को कमजोर करने के प्रयास कर रही देश विरोधी ताकतों और विदेशी षड्यंत्रों के प्रति समाज को सजग रहना होगा – प्रदीप जोशी जी    ||    

दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में 'भाई मनी सिंह स्मृति व्याख्यान' गरिमामय संपन्न; प्रख्यात विद्वानों ने अमर शहीद भाई मनी सिंह जी के ग्रंथात्मक योगदान और अद्वितीय शहादत को किया नमन

IVSK

राजधानी नई दिल्ली के रफ़ी मार्ग स्थित कॉन्स्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया के 'डिप्टी स्पीकर हॉल' में राष्ट्रीय समारोह 'भाई मनी सिंह स्मृति व्याख्यान' अत्यंत गरिमामय और श्रद्धापूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। यह प्रतिष्ठित व्याख्यानमाला 18वीं शताब्दी के महान दार्शनिक, अद्वितीय लिपिकार, कुशल रणनीतिकार और सर्वोच्च संस्थागत रक्षक शहीद भाई मनी सिंह जी के पावन बलिदान दिवस को समर्पित मुख्य आयोजन था।

नई दिल्ली, 15 जून 2026 भाई मनी सिंह शोध एंड अध्ययन संस्थान ट्रस्ट (पंजी०) के तत्वावधान में 14 जून 2026 (रविवार) को राजधानी नई दिल्ली के रफ़ी मार्ग स्थित कॉन्स्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया के 'डिप्टी स्पीकर हॉल' में राष्ट्रीय समारोह 'भाई मनी सिंह स्मृति व्याख्यान' अत्यंत गरिमामय और श्रद्धापूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। यह प्रतिष्ठित व्याख्यानमाला 18वीं शताब्दी के महान दार्शनिक, अद्वितीय लिपिकार, कुशल रणनीतिकार और सर्वोच्च संस्थागत रक्षक शहीद भाई मनी सिंह जी के पावन बलिदान दिवस को समर्पित मुख्य आयोजन था।

समारोह के मुख्य मंच पर अध्यात्म, विधि और शिक्षा जगत की शीर्षस्थ विभूतियाँ सुशोभित थीं, जिनमें मुख्य अतिथि के रूप में पुष्कर आश्रम से पधारे परम पूजनीय 'निर्मला संत' डॉ. रामेश्वरानंद जी, कार्यक्रम के अध्यक्ष भाई रंजीत सिंह जी (मुख्य ग्रंथी, गुरुद्वारा श्री बंगला साहिब, नई दिल्ली), मुख्य वक्ता प्रो० जगबीर सिंह जी (कुलाधिपति, पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय, बठिंडा) तथा डॉ० कुलदीपचन्द अग्निहोत्री जी (पूर्व कुलपति, हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय), और स्वागतकर्ता वक्ता श्री गुरचरण सिंह गिल जी (अपर महाधिवक्ता, राजस्थान) शामिल रहे।

कार्यक्रम की शुरुआत में सबसे पहले मुख्य मंच पर विराजमान इन सभी गणमान्य अतिथियों द्वारा विशेष लघु-पुस्तिका "सिख इतिहास के महान शहीद भाई मनी सिंह जी" का गरिमामय विमोचन किया गया। इस ऐतिहासिक संकलन को समृद्ध बनाने में स्वर्गीय स. चिरंजीव सिंह जी, प्रो० जगबीर सिंह जी, डॉ० कुलदीपचन्द अग्निहोत्री जी, श्री गुरचरण सिंह गिल जी, प्रोफ़ेसर रविंदर सिंह जी और स. गुरलाड सिंह जी जैसे शीर्षस्थ विद्वानों व इतिहासकारों ने अपने शोधपरक लेखों का बहुमूल्य योगदान दिया है।

पुस्तक विमोचन के उपरांत मुख्य वक्ताओं का सत्र आरंभ हुआ, जिसमें सबसे पहले श्री गुरचरण सिंह गिल जी ने विषय-परिवेश प्रस्तुत किया। इसके बाद मुख्य वक्ता प्रो० जगबीर सिंह जी ने 'दसम ग्रंथ' के संकलन व संपादन में भाई साहब की भगीरथ भूमिका पर बोलते हुए कहा कि भाई मनी सिंह जी मध्यकालीन सिख ग्रंथात्मक विद्वत्ता के पितामह थे, जिन्होंने अत्यंत विपरीत राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों में बिखर चुके सिख साहित्य को सहेजकर सिख ज्ञान-परंपरा को अमर बना दिया। दूसरे मुख्य वक्ता डॉ० कुलदीपचन्द अग्निहोत्री जी ने वंजारा (बंजारा) समाज के गौरवशाली इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भाई साहब का परिवार राजा भोज की क्षत्रियोचित व बलिदानी परंपरा का वाहक था, जिसके कुल ३६ वीरों ने देश-धर्म की वैचारिक संप्रभुता के लिए हँसते-हँसते अपने प्राण न्यौछावर कर दिए।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे भाई रंजीत सिंह जी ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में विषय को समेटते हुए मार्मिक शब्दों में कहा कि भाई मनी सिंह जी का जीवन 'शस्त्र और शास्त्र' का एक ऐसा अनूठा पैमाना है, जो हमें यह सिखाता है कि कोई भी सांसारिक हुकूमत मनुष्य के शरीर को तो टुकड़ों में काट सकती है, परंतु उसके जमीर, संकल्प और धर्मनिष्ठा पर कभी विजय प्राप्त नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि आज जब दुनिया भर के करोड़ों सिख अपनी दैनिक अरदास में "बंद-बंद कटाए" वीरों को याद करते हैं, तो भाई मनी सिंह जी की यह ग्रंथात्मक शुद्धता और शहादत हमारी सांस्कृतिक जड़ों की सबसे बड़ी मार्गदर्शक बनकर सामने आती है।

ट्रस्ट की ओर से स. गुरलाड सिंह जी ने व्याख्यान और भाई मनी सिंह जी के जीवन चरित्र पर प्रकाश डाला और उनके जीवन को जन–जन तक ले जाने की आवश्यकता रेखांकित की। व्याख्यानों के पश्चात समारोह के अंत में संस्थान के सचिव श्री राकेश रिखी जी द्वारा मंच पर आसीन सभी सम्मानित अतिथियों, पूज्य संतों और देश भर से आए प्रबुद्ध श्रोताओं का हृदय से धन्यवाद ज्ञापित किया गया। इस पावन अवसर पर मुख्य मंच पर विराजमान सभी माननीय एवं आदरणीय अतिथियों को संस्थान की ओर से उनके अमूल्य समय और मार्गदर्शन के लिए श्रद्धा व सम्मान के प्रतीक स्वरूप 'श्री हरिमंदिर साहिब' का सुंदर मॉडल और शॉल भेंट कर विशेष रूप से सम्मानित व अभिनंदित किया गया।

Related Posts you may like

इंद्रप्रस्थ संवाद - नवीन अंक