पांडव कालिन प्राचीन मंदिर है दिल्ली का किलकारी बाबा भैरव नाथ मंदिर

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पांडवों ने जब दिल्ली को अपनी राजधानी बनाया और यहा पर एक विशाल किले का निर्माण कराया तब भगवान श्रीकृष्ण ने पांडवों को सुझाव दिया कि अपने किले की रक्षा के लिए भगवान भैरो बाबा को यहां स्थापित करना चाहिए। जिसके बाद भगवान श्रीकृष्ण के आदेश के बाद भीम बाबा भैरोनाथ को लेने के लिए कांशी की यात्रा पर गए। कांशी जाकर भीम ने बाबा की अराधना की और उनसे अपने साथ इंद्रप्रस्थ चलने का आग्रह किया। बाबा ने भीम के समक्ष एक वचन रखा और कहा कि यदि वह उन्हें मार्ग में कहीं पर भी उतार देंगे तो वह वहीं पर स्थापित हो जाएंगे। भीम ने बाबा के वचन को स्वीकार कर लिया और उन्हें कंधे पर बैठा कर इंद्रप्रस्थ की तरफ चल पड़े।

भैरव जी को भगवान शिव शंकर भोलेनाथ का उग्र अवतार कहा जाता है। दिल्ली में भैरव बाबा का एक अति प्राचीन मंदिर है। यह मंदिर प्रगति मैदान के पास स्थित है। दिल्ली के सबसे प्राचीन मंदिरों में इसकी गणना होती है। इतिहासकारों का कहना हैं कि यह मंदिर लगभग 5500 साल पुराना है। समय के साथ-साथ यह मंदिर भी बनता संवरता रहा। दिल्ली के अनेक लोगों ने भैरव बाबा के इस मंदिर का पुर्निर्माण कराया। इस मंदिर की स्थापना के पीछे एक एतिहासिक कथा है। पांडवों ने जब दिल्ली को अपनी राजधानी बनाया और यहा पर एक विशाल किले का निर्माण कराया तब भगवान श्रीकृष्ण ने पांडवों को सुझाव दिया कि अपने किले की रक्षा के लिए भगवान भैरो बाबा को यहां स्थापित करना चाहिए। जिसके बाद भगवान श्रीकृष्ण के आदेश के बाद भीम बाबा भैरोनाथ को लेने के लिए कांशी की यात्रा पर गए। कांशी जाकर भीम ने बाबा की अराधना की और उनसे अपने साथ इंद्रप्रस्थ चलने का आग्रह किया। बाबा ने भीम के समक्ष एक वचन रखा और कहा कि यदि वह उन्हें मार्ग में कहीं पर भी उतार देंगे तो वह वहीं पर स्थापित हो जाएंगे। भीम ने बाबा के वचन को स्वीकार कर लिया और उन्हें कंधे पर बैठा कर इंद्रप्रस्थ की तरफ चल पड़े।

इंद्रप्रस्थ की सीमा पर आकर बाबा भैरोनाथ ने अपनी लीला दिखाना आरंभ कर दी और अपनी माया से भीम को मजबूर कर दिया कि वह उन्हें कंधे से उतार दें। काफी प्रयास के बाद भी भीम बाबा को कंधे पर नहीं बैठा पाएं और उन्हें आखिरकार बाबा को वहीं पृथ्वी पर उतारना पड़ा। बाबा अपने वचन के अनुसार वहीं पर स्थापित हो गए। मगर भीम ने पुनः बाबा से प्रार्थना की और उनसे कहा कि उन्होंने अपने भाईयों को वचन दिया था कि वह बाबा को लेकर ही आएंगे। बाबा ने भीम की अराधना से खुश होकर उन्हें अपन जटाएं काट कर सौंप दी और कहा कि इन्हें किले के भीतर स्थापित कर देना तुम्हारे किले को हमेशा सुरक्षा मिलेगी। बाबा ने भीम को वचन दिया कि वह इसी स्थान से किलकारी मार कर पांडवों के किले की रक्षा करेंगे। इसके बाद यह स्थान किलकारी बाबा भैरव नाथ मंदिर के तौर पर प्रतिष्ठित हुआ। यह मंदिर भक्तों को सिध्दियां देने के लिए प्रसिध्द है। प्रतिदिन इस मंदिर में हजारों भक्तों का तांता लगा रहता है।

पांडव कालिन इस प्राचीन मंदिर में दिल्ली के आसपास के लोग दर्शन करने आते है। कहा जाता है इस मंदिर में दर्शन करने से भक्तों के ऊपर टोना टोटके के प्रभाव और दुष्ट आत्माओं का छाया का प्रभाव तत्काल खत्म हो जाता है। बाबा भैरव नाथ के दर्शन से दुष्ट आत्माएं भस्म हो जाती है और भक्तों पर उनका प्रभाव बेअसर हो जाता है। बाबा भैरव नाथ की शक्ति अमिट है। दिल्ली के इस प्राचीन भैरव मंदिर में बाबा की प्रतिमा मुख अर्थात सिर के तौर पर विराजमाना है। मान्यता है कि भैरव बाबा का सिर अमृत से भरा होता है इसलिए जो भक्त भक्तिभाव से उनकी अराधना करते है बाबा भैरव नाथ उन्हें संपन्नता और सुखमय जीवन का वरदान देते है।महाशिवरात्री के दिन इस मंदिर में भक्तों की विशाल भीड़ जुटती है। अनेक नवविवाहित जोड़े यहां आकर अपने दाम्पत्य जीवन की शुरुआत करते है। इंद्रप्रस्थ के प्रवेश व्दार पर स्थापित बाबा भैरवनाथ का यह मंदिर सदियों से दिल्ली की रक्षा कर रहा है। 

 

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