राज्यपाल थावरचंद गहलोत जी ने कहा कि भारत विश्वगुरु बनने की दिशा में अग्रसर है और यह लक्ष्य तभी साकार होगा, जब हम अपनी समृद्ध भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा से जोड़ेंगे। आयुर्वेद, भारतीय भाषाएँ, विज्ञान, इतिहास तथा भारतीय ज्ञान की विविध विधाएँ आज भी संपूर्ण मानवता के लिए अत्यंत प्रासंगिक हैं।
बेंगलुरु, 27 जून 2026। भारतीय शिक्षण मण्डल की तीन दिवसीय (26, 27, 28 जून) अखिल भारतीय प्रान्त टोली बैठक का शुभारम्भ आर्ट ऑफ़ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर में कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत जी ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता भारतीय शिक्षण मण्डल के अखिल भारतीय अध्यक्ष प्रो. सच्चिदानंद जोशी ने की। बैठक में देशभर के सभी 45 प्रांतों से आए शिक्षाविद्, कुलपति, नीति-निर्माता, शोधकर्ता, संगठन पदाधिकारी तथा शिक्षा विशेषज्ञ सहभागी हैं।
उद्घाटन उद्बोधन में राज्यपाल थावरचंद गहलोत जी ने कहा कि भारत विश्वगुरु बनने की दिशा में अग्रसर है और यह लक्ष्य तभी साकार होगा, जब हम अपनी समृद्ध भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा से जोड़ेंगे। आयुर्वेद, भारतीय भाषाएँ, विज्ञान, इतिहास तथा भारतीय ज्ञान की विविध विधाएँ आज भी संपूर्ण मानवता के लिए अत्यंत प्रासंगिक हैं। उन्होंने बल दिया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग भारतीय जीवन-मूल्यों, नैतिकता एवं उत्तरदायित्व के साथ किया जाना चाहिए, तभी उनका लाभ समस्त मानव समाज तक पहुँच सकेगा।
प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए भारतीय शिक्षण मण्डल के अखिल भारतीय महामंत्री प्रो. भरत शरण सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के उद्देश्यों को सफलतापूर्वक साकार करने के लिए शिक्षण संस्थानों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं तथा नीति-निर्माताओं के समन्वित एवं सहयोगात्मक प्रयास आवश्यक हैं। भारतीय ज्ञान परंपरा को शिक्षा के व्यवहार में उतारना वर्तमान समय की आवश्यकता है।
अध्यक्षीय उद्बोधन में भारतीय शिक्षण मण्डल के अखिल भारतीय अध्यक्ष प्रो. सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि विकसित भारत-2047 के संकल्प की सिद्धि में शिक्षा की भूमिका सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। भारतीय शिक्षा व्यवस्था को औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्त कर भारतीय दृष्टि, भारतीयता तथा मूल्यपरक शिक्षा पर आधारित नई शैक्षणिक संस्कृति का निर्माण समय की आवश्यकता है। उन्होंने भारतीय शिक्षण मण्डल द्वारा शिक्षा के भारतीयकरण, भारतीय ज्ञान परंपरा के संवर्धन तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु देशभर में संचालित विभिन्न नवाचारी पहलों का भी उल्लेख किया।
इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ. मनमोहन वैद्य जी, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव अतुल कोठारी तथा भारतीय शिक्षण मण्डल के अखिल भारतीय संगठन मंत्री बी. आर. शंकरानंद सहित शिक्षाविदों एवं गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
तीन दिनों में गत वर्ष के संगठनात्मक कार्यों की समीक्षा, आगामी वर्ष की कार्ययोजना पर चर्चा तथा भारतीय ज्ञान परंपरा आधारित पाठ्यचर्या, शिक्षक विकास, अनुसंधान, नवाचार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के नैतिक उपयोग और उच्च शिक्षा में भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रभावी क्रियान्वयन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

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