देश में कपास की खेती में कमी का मूल कारण बी.टी. कपास – भारतीय किसान संघ

IVSK

भारतीय किसान संघ ने बी.टी. कपास को कपास उत्पादन में कमी का कारण बताते हुए जी.एम. फसलों पर प्रतिबंध और देसी बीज आधारित कृषि को बढ़ावा देने की मांग की।

नई दिल्ली, 24 जून 2026। भारतीय किसान संघ के अखिल भारतीय महामंत्री मोहिनी मोहन मिश्र ने किसान संघ कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में कहा कि देश में कपास उत्पादन में आ रही गिरावट का एकमात्र कारण बी.टी. कपास है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र भेजकर स्पष्ट किया है कि कपास उत्पादन की कमी के पीछे जी.एम. (अनुवांशिक रूप से संशोधित) फसलों के पक्षकारों द्वारा फैलाया जा रहा गलत नैरेटिव है। बी.टी. कपास कभी भी अधिक उपजाऊ नहीं था। जिस कीड़े पिंक बोलवार्म को नियंत्रित करने के लिए इसे विकसित किया गया था, उसे रोकने में यह पूर्णतः असफल रहा है। बी.टी. कपास के आने से देश के विभिन्न प्राकृतिक जलवायु क्षेत्रों में होने वाली कपास की पारंपरिक और देसी प्रजातियां समाप्त हो गई हैं, जिसके कारण कुल उपज में भारी कमी आई है।

उन्होंने कहा कि इस संकट से मुक्ति पाने के लिये देश को दोबारा अपनी उच्च उपज वाली देसी किस्मों और पारंपरिक कृषि व्यवस्था को अपनाने की आवश्यकता है। विदेशी कंपनियों के प्रभाव व दबाव के चलते कृषि में बेतहाशा रसायनों के प्रयोग से कृषि उत्पाद जहरीले हो रहे हैं। ग्लाइफोसेट व पैराकाट डाइक्लोराइड रसायनों के बढ़ते प्रयोग से कैंसर जैसी बीमारी अब महामारी का रूप लेती जा रही है जो जनसामान्य के लिये गंभीर चिंता का विषय है। इस पर रोक लगना चाहिये।

कपास का उत्पादन बढ़ाने की तकनीकी की खोज करने पर पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित श्रीरंग देउबा लाड ने बताया कि देश के कपास उत्पादक किसानों को स्वावलंबी व आत्मनिर्भर बनाने के लिये देशी उन्नत बीज व तकनीकी के प्रशिक्षण की आवश्यकता है, न कि जीएम बीज की। दादा लाड ने सरकार को प्रस्ताव देते हुये कहा कि आईसीएआर द्वारा प्रमाणित कपास का उत्पादन बढ़ाने की इस तकनीकी का देशभर में प्रशिक्षण देने के लिये तैयार हैं। सभी किसानों तक इस तकनीकी को पहुंचाने के लिये सरकार को इस दिशा में सहयोग करना चाहिये।

भारतीय किसान संघ की प्रमुख मांगें

  1. बी.टी. कपास की किस्मों (बी.जी.-1 और बी.जी.-2) को तत्काल प्रभाव से डी-नोटीफाई किया जाए।
  2. सभी जी.एम. फसलों पर देश में पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए।
  3. बी.टी. कपास के पक्ष में भ्रामक और गलत नैरेटिव तैयार कर देश के किसानों को गुमराह करने वालों के खिलाफ जांच कर सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

 

Related Posts you may like

इंद्रप्रस्थ संवाद - नवीन अंक