राष्ट्र हम सब के लिये प्रथम होना चाहिए: सुनील आंबेकर

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नर्मदा साहित्य मंथन-भोजपर्व का उद्घाटन रविवार 22 जनवरी 2023 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर की उपस्थिति में माँ नर्मदा के जल कलश के पूजन के साथ हुआ। इस अवसर पर नर्मदा साहित्य मंथन के संयोजक डॉ. मुकेश मोढ़ एवं मध्यप्रदेश शासन की संस्कृति मंत्री उषा ठाकुर भी उपस्थित रहीं।

नर्मदा साहित्य मंथन-भोजपर्व कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने कहा कि राजा भोज के सांस्कृतिक एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण से स्वावलंबन और स्व के लिए गौरव समाज में स्थापित हुआ है। राजा भोज के वास्तुशिल्प पर स्थापित किए गए मानक आज भी प्रासंगिक हैं। राज्य व्यवस्था के संचालन के लिए राजा भोज की शासन व्यवस्था से सीखने की आवश्यकता है। उन्होंने कृषि के लिए उन्नत तकनीक विकास का भी कार्य किया।

नर्मदा साहित्य मंथन-भोजपर्व का उद्घाटन रविवार 22 जनवरी 2023 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर की उपस्थिति में माँ नर्मदा के जल कलश के पूजन के साथ हुआ। इस अवसर पर नर्मदा साहित्य मंथन के संयोजक डॉ. मुकेश मोढ़ एवं मध्यप्रदेश शासन की संस्कृति मंत्री उषा ठाकुर भी उपस्थित रहीं।

श्री आंबेकर ने कहा कि हमारा अतीत गौरवशाली रहा है, परंतु हमें उसे षड्यंत्र पूर्वक नहीं पढ़ाया गया। हमें उसे पढ़ने और उस पर अभिमान करने के साथ साथ भविष्य का भारत गढ़ने में उसका उपयोग करना चाहिए। वेदों में राष्ट्र की आराधना का उल्लेख मिलता है। राष्ट्र हम सब के लिये प्रथम होना चाहिए।

इस अवसर पर राजा भोज पर आधारित जागृत मालवा मासिक पत्रिका के विशेषांक का विमोचन किया गया।

उद्घाटन सत्र में मध्यप्रदेश शासन की संस्कृति मंत्री उषा ठाकुर दीदी ने कहा कि पुराने ग़लत साहित्य को उखाड़ फेंकने और वास्तविक साहित्य को स्थापित करने में साहित्य मंथन जैसे आयोजनों की महत्वपूर्ण भूमिका है। हम प्रयास कर रहे हैं कि विद्यालयों में प्रतिदिन 5 मिनट विद्यार्थियों के बीच क्रांतिकारियों एवं महापुरुषों का जीवन परिचय रखा जाए।

साहित्य मंथन के प्रथम सत्र में उत्तराखण्ड के राज्यपाल लेफ़्टिनेंट जनरल (रिटा.) गुरमीत सिंह ने आंतरिक सुरक्षा, चुनौतियों एवं समाधान विषय पर कहा कि राष्ट्र और समाज के लिए कार्य करना एक महान कार्य है। आज जहां लोग अपने परिवार से बाहर नहीं सोच पा रहे। ऐसी स्थिति में जब युवा, साहित्यकार और विचारक साहित्य मंथन जैसे आयोजनों के माध्यम से राष्ट्र की सुरक्षा जैसे विषयों से जुड़ता है तो मुझे विश्वास है, उस देश का कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। गलवान घाटी हमले के बाद जिस प्रकार पूरे देश ने एकजुटता दिखाई है, वह प्रशंसा और गर्व करने लायक़ है। भारत के लोगों को अपनी शक्ति को पहचानना होगा। पूरा विश्व जानता है कि हम आत्मविश्वास से भरी शक्ति हैं। परन्तु दुर्भाग्य है कि हम अपने पर ही विश्वास नहीं करते। उन्होंने कहा कि समाज के सामने चुनौतियां बहुत हैं और उसके लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति को सैनिक बनना होगा। वर्तमान में हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती चीन है। उन्होंने उपस्थित सभी विचारकों से इस विषय में अध्ययन करने और उसके बारे में चिंतन करने का आग्रह किया।

 

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