व्यक्ति के लिए पिता का महत्व सबसे अधिक होता है। पिता की दी हुई सीख और मार्गदर्शन को जीवन में उतार लिया जाए तो संतान संस्कारी और सफल हो सकती है। रामायण और महाभारत जैसे शास्त्रों में भी कई पिता के धर्म के बारे में बताया गया है।
व्यक्ति के लिए पिता का महत्व सबसे अधिक होता है। पिता की दी हुई सीख और मार्गदर्शन को जीवन में उतार लिया जाए तो संतान संस्कारी और सफल हो सकती है। रामायण और महाभारत जैसे शास्त्रों में भी कई पिता के धर्म के बारे में बताया गया है।
शिव जी: जब समाज को संतान की जरूरत हो तो उसे न रोकें - शिव जी और देवी पार्वती के पुत्र कार्तिकेय स्वामी का पालन माता-पिता से दूर एक वन में कृतिकाओ ने किया था। बाद में जब शिवजी को कार्तिकेय के बारे में मालूम हुआ तो उन्हें कैलाश बुलाया गया। उस समय तारकासुर को वर मिला हुआ था की शिव जी का पुत्र ही उसका वध करेगा। तारकासुर की वजह से सभी देवता बहुत त्रस्त थे। देवता शिव जी के पास पहुंचे और कार्तिकेय स्वामी से तारकासुर का वध करने की प्रार्थना करने लगे। शिव जी ने बहुत समय बाद आए पुत्र कार्तिकेय को देवताओं की मदद के लिए तुरंत भेज दिया था।
राजा दशरथ : वचन दे तो सोच कर दें - राजा दशरथ अपने पुत्र श्रीराम को बहुत अधिक प्रेम करते थे। कैकयी को दिए हुए वचनों की वजह से श्रीराम को वनवास जाना पड़ा था। जब कैकयी को वचन दिए थे तब उन्होंने सोचा नहीं था कि कैकयी ऐसे वचन भी मांग सकती है। श्रीराम के वनवास जाने के बाद वे भी अधिक दिनों तक जीवित नहीं रह सके। अंतिम समय में दशरथ को अपनी एक गलत ही याद आ रही थी। गलती से श्रवण कुमार को बाण मार दिया था। श्रवण कुमार के माता पिता ने ही दशरथ को पुत्र वियोग में तड़पने का श्राप दिया था। दशरथ की सीख यही है कि हमारा भाग्य हमारे कर्मों से ही बनता है और कभी भी बिना सोचे समझे किसी को वचन नहीं देना चाहिए।
रावण : - पिता गलत कामों से बचें – मेघनाद बहुत ही शक्तिशाली था। उसने देवराज इंद्र को भी पराजित कर दिया। लेकिन रावण की अहंकार और अधर्म की वजह से श्रीराम - लक्ष्मण से युद्ध के समय मेघनाथ को अपने प्राण गंवाने पड़े। पिता को गलत कर्मों से बचना चाहिए वरना पिता के गलत कामों का फल संतान को भी भोगना पड़ता है।
बाली: संतान को सही सलाह दें – सुग्रीव का भाई था बाली। श्रीराम ने अपने मित्र सुग्रीम के दुखों को दूर करने के लिए बाली को बाण मार दिया था। तब बाली ने अंतिम समय में अपने पुत्र अंगद को सीख दी थी कि देश काल और परिस्थितियों को समझकर सही निर्णय लेना चाहिए। बाली को अपनी गलतियों का एहसास हो गया था इस कारण बाली ने अंगद को श्रीराम की सेवा में रहने के लिए कहा था।
धृतराष्ट्र: संतान की गलतियों को नजरअंदाज ना करें – महाभारत में धृतराष्ट्र ने हमें सीख दी है कि कभी भी संतान के गलत कामों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। संतान कोई गलत काम करती है तो उसे रोकना चाहिए। धृतराष्ट्र ने पुत्र मोह में दुर्योधन को अधर्म करने से नहीं रोका इस कारण उनके पूरे वंश का नाश हो गया।
अर्जुन: संतान को अधूरा ज्ञान ना दें - अर्जुन और सुभद्रा का पुत्र था अभिमन्यु। जब सुभद्रा गर्भवती थी तो अर्जुन सुभद्रा को चक्रव्यूह भेदने का रहस्य बता रहे थे। उस समय बीच में ही सुभद्रा को नींद आ गई थी। सुभद्रा के गर्भ में अभिमन्यु चक्रव्यूह भेदने का रहस्य सुन रहा था, माता के सो जाने की वजह से वह पूरी रहस्य जान नहीं सका। बाद में जब महाभारत युद्ध हुआ तो अभिमन्यु चक्रव्यूह में फंस गया था और कौरवों ने उसका वध कर दिया था। पिता को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि संतान को किसी बात का अधूरा ज्ञान ना हो। संतान को हर काम का पूरा ज्ञान देने की कोशिश करनी चाहिए। अधूरा ज्ञान हमेशा खतरनाक होता है।

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