गरिमामय जीवन जीने का अधिकार ही है मानवाधिकार

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अगर हम बात करें मानवाधिकार की तो मानवाधिकार वे अधिकार हैं जो किसी भी व्यक्ति को जन्म के साथ ही मिल जाते हैं। इसको आसन शब्दों में कहें तो किसी भी व्यक्ति के जीवन, स्वतंत्रता, समानता और प्रतिष्ठा का अधिकार ही मानव अधिकार है। इनके अंतर्गत राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक जैसे अन्य अधिकार भी शामिल हैं।

मनुष्य के रूप में जन्म लेने वाले प्रत्येक प्राणी की एक गरिमा होती है और मनुष्य होने के नाते उसे गरिमामय जीवन जीने का पूरा अधिकार है, इसलिए पैदा होते ही प्रकृति उसे वे सब अधिकार प्रदान करती है जो एक मानव जाति के अस्तित्व के लिये ज़रूरी हैं।

अगर हम बात करें मानवाधिकार की तो मानवाधिकार वे अधिकार हैं जो किसी भी व्यक्ति को जन्म के साथ ही मिल जाते हैं। इसको आसन शब्दों में कहें तो किसी भी व्यक्ति के जीवन, स्वतंत्रता, समानता और प्रतिष्ठा का अधिकार ही मानव अधिकार है। इनके अंतर्गत राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक जैसे अन्य अधिकार भी शामिल हैं। इन्हीं अधिकारों के संबंध में संयुक्त राष्ट्र ने साल 1948 में एक घोषणा-पत्र जारी किया था। इस घोषणा-पत्र में कहा गया था कि मानव के बुनियादी अधिकार किसी भी नस्ल, जाति, धर्म, लिंग, समुदाय और भाषा आदि से भिन्न होते हैं।

वैसे तो मानव अधिकारों की कोई एक निश्चित संख्या नहीं है। संयुक्त राष्ट्र के सार्वभौमिक घोषणापत्र में उल्लिखित मानवाधिकारों को सामान्य तौर पर नागरिक-राजनीतिक और आर्थिक-सामाजिक-सांस्कृतिक श्रेणियों में बाँटा गया है। इसके अनुच्छेद-3 में व्यक्ति की स्वतंत्रता एवं सुरक्षा के अधिकारों की बात कही गई है जो अन्य सभी अधिकारों के उपभोग के लिये ज़रूरी हैं।

नागरिक एवं राजनीतिक अधिकार

सार्वभौमिक घोषणापत्र में नागरिक व राजनीतिक अधिकारों के अन्तर्गत आने वाले प्रमुख अधिकार इस प्रकार हैं-

  • दासता से मुक्ति का अधिकार
  • निर्दयी, अमानवीय व्यवहार अथवा सजा से मुक्ति का अधिकार
  • कानून के समक्ष समानता का अधिकार
  • प्रभावशाली न्यायिक उपचार का अधिकार
  • आवागमन तथा निवास स्थान चुनने की स्वतंत्रता
  • शादी करके घर बसाने का अधिकार
  • विचार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
  • उचित निष्पक्ष मुकदमें का अधिकार
  • मनमर्जी की गिरफ्तारी अथवा बंदीकरण से मुक्ति का अधिकार
  • न्यायालय द्वारा सार्वजनिक सुनवाई का अधिकार
  • अपराधी साबित होने से पहले बेगुनाह माने जाने का अधिकार
  • व्यक्ति की गोपनीयता, घर, परिवार तथा पत्र व्यवहार में अवांछनीय हस्तक्षेप पर प्रतिबंध
  • शांतिपूर्ण ढंग से किसी स्थान पर इकट्ठा होने का अधिकार
  • शरणागति प्राप्त करने का अधिकार
  • राष्ट्रीयता का अधिकार
  • अपने देश की सरकारी गतिविधियों में भाग लेने का अधिकार
  • अपने देश की सार्वजनिक सेवाओं तक सामान पहुँच का अधिकार

आर्थिक, सामाजिक तथा सांस्कृतिक अधिकार-

इनके अंतर्गत आने वाले प्रमुख अधिकार निम्नलिखित हैं-

  • सामाजिक सुरक्षा का अधिकार
  • समान काम के लिये समान वेतन का अधिकार
  • काम करने का अधिकार
  • आराम तथा फुर्सत का अधिकार
  • शिक्षा तथा समाज के सांस्कृतिक जीवन में भाग लेने का अधिकार

मानवाधिकार दिवस हर साल 10 दिसंबर को संयुक्त राष्ट्र द्वारा मानवाधिकारों की इसी सार्वभौमिक घोषणा (यूडीएचआर) के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। इसे 1948 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा अपनाया और घोषित किया गया था। यह मानवाधिकारों को संरक्षण और संवर्धन देने के लिए एक वैश्विक मापदंड है। भारत में हर भारतीय की मानवाधिकार की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (एनएचआरसी) है।

मानवाधिकार आयोग का पता

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग

मानवाधिकार भवन, ब्लॉक सी

जी.पी.ओ. काम्प्लेक्स,

आई ऐन ऐ, दिल्ली 110023

बेबसाइट : www.nhrc.nic.in

 

इंद्रप्रस्थ संवाद - नवीन अंक