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सनातन संस्कृति सदैव शांति, सह-अस्तित्व और मानव कल्याण की भावना को पोषित करती रही है – जे. नंदकुमार जी

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अखिल भारतीय संयोजक जे. नंदकुमार जी ने कहा कि युवा केवल रोजगार और व्यक्तिगत सफलता तक सीमित न रहें, बल्कि सामाजिक सरोकारों और नागरिक दायित्वों के प्रति भी जागरूक रहें।

झांसी, 7 सितम्बर 2026। संघ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ झांसी महानगर ने रविवार को ‘युवा व्यवसायी संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन किया। पंडित दीनदयाल सभागार में शाम चार से छह बजे तक आयोजित कार्यक्रम में युवाओं से राष्ट्र निर्माण, नागरिक कर्तव्य, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता और परिवार प्रबोधन जैसे विषयों पर संवाद हुआ। बौद्धिक सत्र के बाद युवाओं ने विभिन्न विषयों से जुड़े 15 सवाल पूछे, जिनका मुख्य वक्ता ने विस्तार से उत्तर देकर जिज्ञासाओं का समाधान किया। अंत में राष्ट्र गान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। मंच पर विभाग संघचालक शिव कुमार भार्गव जी और महानगर संघचालक सतीश शरण जी भी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और वन्दे मातरम के साथ हुआ। मुख्य वक्ता प्रज्ञा प्रवाह के अखिल भारतीय संयोजक जे. नंदकुमार जी ने युवाओं से संवाद करते हुए भारतीय संस्कृति में निहित उन विचारों और मूल्यों को विस्तार से समझाया, जो समाज और राष्ट्र के कल्याण का आधार माने जाते हैं। उन्होंने ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ और ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ जैसे विचारों की व्याख्या करते हुए कहा कि भारतीय चिंतन केवल अपने कल्याण तक सीमित नहीं है, बल्कि संपूर्ण विश्व के सुख और शांति की कामना करता है। हमें हिन्दू होने पर गर्व महसूस होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत हिन्दू राष्ट्र था, है और रहेगा। अब अखण्ड भारत बनकर रहेगा। इसके लिए अविराम रूप से कार्य चल रहा है।

जे. नंदकुमार जी ने कहा कि भारत को विश्वगुरु बनाने की दिशा में इन मानवीय और सार्वभौमिक विचारों की महत्वपूर्ण भूमिका है। विश्व के कल्याण के लिए युद्ध का रास्ता नहीं, मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम के विचारों और ज्ञान का मार्ग अपनाने की आवश्यकता है। सनातन संस्कृति सदैव से शांति, सह-अस्तित्व और मानव कल्याण की भावना को पोषित करती रही है। उन्होंने युवा की परिभाषा को विस्तार पूर्वक समझाया।

संवाद के दौरान युवाओं को देश और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने तथा राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया। मुख्य वक्ता ने कहा कि युवा केवल रोजगार और व्यक्तिगत सफलता तक सीमित न रहें, बल्कि सामाजिक सरोकारों और नागरिक दायित्वों के प्रति भी जागरूक रहें।

संघ की कार्यपद्धति और युवाओं का दायित्व

जे. नंदकुमार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की संगठनात्मक पद्धति का उल्लेख करते हुए बताया कि व्यक्ति-व्यक्ति से संवाद, साथ बैठना, खेलना, सीखना और साथ काम करना संघ की कार्यपद्धति का अहम हिस्सा है। इसी सहज संवाद के कारण संगठन डिजिटल युग की पीढ़ी से अपनी मूल प्रकृति बचाए रखते हुए जुड़ रहा है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे केवल रोजगार और व्यक्तिगत सफलता तक सीमित न रहें, बल्कि सामाजिक सरोकारों के प्रति भी जागरूक रहें। देश का भविष्य युवाओं के हाथों में है, जिसके लिए आत्मविश्वास, दृढ़ निश्चय, साहस और निर्भीकता जैसे गुण अत्यंत आवश्यक हैं।

 

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