मुख्य वक्ता अखिल भारतीय सामाजिक सद्भावना प्रमुख डॉ. गोपाल प्रसाद महापात्र जी ने कहा कि भारतवर्ष की पूर्ण स्वतंत्रता के स्वप्न को साकार करने के उद्देश्य से डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने 1925 की विजयादशमी के दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की थी। पूर्ण स्वतंत्रता का अर्थ केवल राजनीतिक स्वतंत्रता नहीं, बल्कि परम वैभवशाली भारत का निर्माण है, जो व्यक्ति के चरित्र परिवर्तन तथा लोकशक्ति के जागरण से ही संभव हो सकता है। इसी उद्देश्य से भारतवर्ष के पुत्ररूपी हिन्दू समाज के संगठन का कार्य संघ की शाखाओं के माध्यम से आज एक विशाल वटवृक्ष का रूप ले चुका है।
संबलपुर, 06 जून 2026। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ स्वयंसेवकों की गुणवत्ता एवं दक्षता में वृद्धि, संघ कार्य के विस्तार तथा कार्यकर्ता निर्माण के उद्देश्य से संघ शिक्षा वर्गों का आयोजन करता है। इस वर्ष संबलपुर स्थित वैदिक इंटरनेशनल विद्यालय परिसर में दो वर्गों का आयोजन किया गया।
दोनों वर्गों में 368 स्थानों से 479 शिक्षार्थियों सहित कुल 614 प्रतिभागियों ने भाग लिया। सभी शिक्षार्थियों ने अपने यात्रा व्यय तथा अन्य सभी खर्च स्वयं वहन किए।
समापन समारोह में मुख्य अतिथि वीर सुरेंद्र साय तकनीकी विश्वविद्यालय के वित्त नियंत्रक तुलाराम कलेत रहे। उन्होंने स्वयंसेवकों को समाज एवं राष्ट्र निर्माण में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया।
मुख्य वक्ता अखिल भारतीय सामाजिक सद्भावना प्रमुख डॉ. गोपाल प्रसाद महापात्र जी ने कहा कि भारतवर्ष की पूर्ण स्वतंत्रता के स्वप्न को साकार करने के उद्देश्य से डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने 1925 की विजयादशमी के दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की थी। पूर्ण स्वतंत्रता का अर्थ केवल राजनीतिक स्वतंत्रता नहीं, बल्कि परम वैभवशाली भारत का निर्माण है, जो व्यक्ति के चरित्र परिवर्तन तथा लोकशक्ति के जागरण से ही संभव हो सकता है। इसी उद्देश्य से भारतवर्ष के पुत्ररूपी हिन्दू समाज के संगठन का कार्य संघ की शाखाओं के माध्यम से आज एक विशाल वटवृक्ष का रूप ले चुका है।
समाज परिवर्तन के लिए संघ शक्ति के आधार पर संघ के स्वयंसेवक पंच परिवर्तन के विषयों को समाज के आचरण का हिस्सा बनाने हेतु प्रयासरत हैं। ये पाँच परिवर्तन हैं – नागरिक शिष्टाचार, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, स्व-आधारित जीवनशैली तथा कुटुंब प्रबोधन।
उन्होंने कहा कि लोकशक्ति के जागरण के माध्यम से जब राष्ट्रधर्म का पालन होगा, तब समाज में व्यापक परिवर्तन आएगा और भारत पूर्ण स्वतंत्रता के साथ परम वैभवशाली राष्ट्र के रूप में स्थापित होकर संपूर्ण विश्व को दिशा प्रदान करेगा।

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