समरस और सशक्त भारत का संकल्प

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सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल जी ने कहा कि संघ ने राष्ट्र-आराधना के 100 वर्ष पूर्ण किए हैं। 1925 में रोपित बीज आज एक विशाल वटवृक्ष बन चुका है, जिसका एकमात्र ध्येय भारत को परम वैभव पर पहुँचाना है।

बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश। संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त सरस्वती विद्या मन्दिर (कन्या) बिलासपुर के सभागार में संघ यात्रा – व्यक्ति “निर्माण से राष्ट्र निर्माण की यात्रा’” विषय पर प्रमुख जन गोष्ठी का आयोजन किया गया।

मुख्य वक्ता सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल जी ने कहा कि संघ ने राष्ट्र-आराधना के 100 वर्ष पूर्ण किए हैं। 1925 में रोपित बीज आज एक विशाल वटवृक्ष बन चुका है, जिसका एकमात्र ध्येय भारत को परम वैभव पर पहुँचाना है।

उन्होंने कहा, “संघ की शाखाएं केवल शारीरिक व्यायाम का केंद्र नहीं, बल्कि देशभक्ति से ओत-प्रोत चरित्रवान व्यक्तियों के निर्माण की कार्यशालाएं हैं, जो समाजहित को सर्वोपरि रखते हैं। संघ भेदभाव मुक्त, समरस और शक्तिशाली भारत के निर्माण का एक व्यापक राष्ट्रीय आंदोलन है।”

अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति:

कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्य अतिथि लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) दलजीत सिंह (कार्यकारी निदेशक, एम्स बिलासपुर) ने की। कार्यक्रम का शुभारंभ ‘वंदे मातरम्’ के सामूहिक गान के साथ हुआ।

गोष्ठी में सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी, पूर्व न्यायाधीश, प्रशासनिक अधिकारी, कुलपति, अधिवक्ता, शिक्षाविद् और समाज के विभिन्न वर्गों के प्रबुद्ध जन उपस्थित रहे।

 

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