‘तू मैं, एक रक्त’ के राष्ट्रीय भाव को सुदृढ़ करेगा जनजाति सांस्कृतिक समागम 2026

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सांस्कृतिक समागम का मुख्य विचार सूत्र  होगा — “तू मैं – एक रक्त, वनवासी – ग्रामवासी – नगरवासी, हम सब भारतवासी”।

नई दिल्ली, 11 मई 2026। जननायक भगवान बिरसा मुंडा के 150वें जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में जनजाति सुरक्षा मंच द्वारा जनजाति सांस्कृतिक समागम का आयोजन किया जा रहा है। आज प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित प्रेस वार्ता में लालकिला मैदान में 24 मई को प्रस्तावित सांस्कृतिक समागम के संबंध में जानकारी प्रदान की।

जनजाति सुरक्षा मंच के राष्ट्रीय सह संयोजक डॉ. राजकिशोर हांसदा, राष्ट्रीय टोली सदस्य पूर्व न्यायाधीश प्रकाश उईके, जनजाति सुरक्षा मंच दिल्ली संयोजक अशोक कुमार गोंड ने जनजाति सांस्कृतिक समागम की जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा भारत में स्वतंत्रता, सांस्कृतिक अस्मिता और सामुदायिक चेतना के प्रतीक हैं। यह समागम एक ऐतिहासिक राष्ट्रीय आयोजन के रूप में परिकल्पित है। समागम में देशभर की 500 से अधिक जनजातियों के डेढ़ लाख प्रतिभागियों की उपस्थिति संभावित है। सब प्रतिभागी अपने स्वयं के खर्च पर दिल्ली आ रहे हैं। यह अत्यंत व्यापक सांस्कृतिक आयोजन होगा। अपनी धर्म-संस्कृति, परम्परा के विषय को लेकर जनजाति समाज राजधानी दिल्ली में इतनी बड़ी संख्या में पहली बार एकत्रित हो रहा है।

भव्य सांस्कृतिक शोभा यात्रा समागम का प्रमुख आकर्षण रहेगा। अपनी पारंपरिक वेशभूषा में देश के विभिन्न हिस्सों से आए जनजाति समाज शोभायात्रा में सम्मिलित होकर संस्कृति-परम्परा का दर्शन कराएंगे। शोभा यात्रा पाँच विभिन्न स्थलों से प्रारंभ होगी, जो जनजातीय परंपराओं और सांस्कृतिक विविधता का प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व करेगी। यात्राएँ लाल किले पर आकर एकत्रित होंगी, जहाँ जनसभा का आयोजन किया गया है। उन्होंने बताया कि भारत के गृहमंत्री अमित शाह जी लाल किले पर आयोजित जनसभा में प्रमुख अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।

सांस्कृतिक समागम का मुख्य विचार सूत्र  होगा — “तू मैं – एक रक्त, वनवासी – ग्रामवासी – नगरवासी, हम सब भारतवासी”।

समागम के प्रमुख उद्देश्य हैं –

  • भगवान बिरसा मुंडा की विरासत को याद करना
  • जनजतियों की समृद्ध सांस्कृतिक एवं गौरवशाली परंपरा का स्मरण
  • सांस्कृतिक आदान-प्रदान और संवाद के लिए एक राष्ट्रीय मंच
  • सामाजिक समरसता के भाव को सुदृढ़ करना

सांस्कृतिक समागम के निमित्त सुदूर वनों-पर्वतों में निवास करने वाले वनवासी बंधुओं को जानने का, उनका स्वागत करने का अवसर पहली बार दिल्ली के नागरिकों को मिल रहा है, इसलिए विभिन्न राज्यों से लाखों की संख्या में आने वाले अपने जनजाति बंधुओं की सभी प्रकार की व्यवस्थाओं के लिए दिल्लीवासी भी प्रयासरत हैं। दिल्ली के कार्यकर्ताओं ने विभिन्न स्थानों पर आवास, भोजन-पानी, यातायात, चिकित्सा, सुरक्षा और स्वच्छता की व्यवस्था की है।

यह केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर एक साथ आने का महत्वपूर्ण अवसर है। दिल्ली में होने वाला यह सांस्कृतिक समागम ‘तू – मैं, एक रक्त’ के राष्ट्रीय भाव को अधिक सुदृढ़ करेगा।

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