कार्यक्रम में देश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों, नीति-निर्माताओं, शिक्षाविदों, प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों, विद्यार्थियों तथा उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर राष्ट्र निर्माण एवं सामाजिक परिवर्तन में विज्ञान और प्रौद्योगिकी की भूमिका पर व्यापक विचार-विमर्श किया।
नई दिल्ली, 11 मई 2026। इंद्रप्रस्थ विज्ञान भारती एवं दिल्ली विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में ऐतिहासिक वाइस-रीगल लॉज में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस 2026 का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में देश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों, नीति-निर्माताओं, शिक्षाविदों, प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों, विद्यार्थियों तथा उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर राष्ट्र निर्माण एवं सामाजिक परिवर्तन में विज्ञान और प्रौद्योगिकी की भूमिका पर व्यापक विचार-विमर्श किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ पंजीकरण प्रक्रिया के पश्चात दीप प्रज्वलन, भारत माता को पुष्पांजलि एवं विश्वविद्यालय कुलगीत के साथ हुआ। इंद्रप्रस्थ विज्ञान भारती के अध्यक्ष एवं इंटर यूनिवर्सिटी एक्सीलरेटर सेंटर के निदेशक प्रो. अविनाश चंद्र पांडेय ने स्वागत भाषण देते हुए आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में वैज्ञानिक नवाचार की भूमिका पर विशेष बल दिया।
विज्ञान भारती के राष्ट्रीय महासचिव श्री विवेकानंद पाई ने विशिष्ट अतिथि के रूप में सभा को संबोधित करते हुए वैज्ञानिक प्रगति को राष्ट्रीय विकास की प्राथमिकताओं से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया। उद्घाटन सत्र के दौरान भारत की सबसे बड़ी ऑनलाइन विज्ञान प्रतिभा खोज परीक्षा "विद्यार्थी विज्ञान मंधन" की पुस्तिका का भी विमोचन किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने की। इस अवसर पर दिल्ली की माननीय मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता का विशेष वीडियो संदेश भी प्रस्तुत किया गया। उन्होंने स्थानीय शहरी समस्याओं के समाधान हेतु स्थानीय स्तर पर नवाचार विकसित करने के उद्देश्य से "दिल्ली विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार परिषद" की स्थापना की योजना का भी उल्लेख किया। मुख्य अतिथि नीति आयोग के माननीय सदस्य प्रो. गोवर्धन दास ने भारत की तकनीकी प्रगति एवं नवाचार आधारित सुशासन की भूमिका पर मुख्य वक्तव्य प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण "विश्व स्तरीय राजधानी के रूप में दिल्लीः एक वैश्विक मॉडल" विषय पर आयोजित पैनल चर्चा रही, जिसमें प्रो. एम. एम. त्रिपाठी, प्रो. रंजना अग्रवाल, प्रो. ए. के. भागी तथा डॉ. सचिन पुडे सहित अनेक विशेषज्ञों ने भाग लिया। चर्चा में सतत शहरी विकास, जलवायु अनुकूलन, तकनीकी अवसंरचना तथा भविष्य उन्मुख शहरों के लिए वैज्ञानिक नीति निर्माण जैसे विषयों पर विचार व्यक्त किए गए।
दोपहर के सत्र में विजेता विद्यार्थियों द्वारा फ्लैश प्रस्तुतियाँ दी गई। इसके पश्चात इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र के पूर्व निदेशक श्री चंद्रशेखर गौरिनाथ करहाडकर ने "वैज्ञानिक उत्कृष्टता से सामाजिक प्रभाव तक परमाणु प्रौद्योगिकी में भारत की यात्रा" विषय पर विशेष व्याख्यान दिया।
एक अन्य महत्वपूर्ण पैनल चर्चा "क्रिस्टलाइजिंग प्रोग्रेसः दिल्ली विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद की भूमिका" विषय पर आयोजित की गई, जिसमें प्रो. शेखर सी. मांडे, डॉ. अनिल कोठारी तथा डॉ. अनीता अग्रवाल सहित कई प्रमुख वैज्ञानिकों एवं नीति-निर्माताओं ने भाग लिया। चर्चा में विज्ञान संचार, नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र तथा प्रौद्योगिकी आधारित सामाजिक सशक्तिकरण को मजबूत करने पर बल दिया गया।
समापन सत्र में बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री रिसर्च असिस्टेंस काउंसिल (BIRAC) के प्रबंध निदेशक डॉ. जितेंद्र कुमार, विज्ञान भारती के श्री प्रवीण रामदास तथा प्रो. योगेश सिंह ने अपने विचार व्यक्त किए। "वे फॉरवर्ड" विषय पर समापन संबोधन दिल्ली के माननीय उपराज्यपाल सरदार तरणजीत सिंह संधू द्वारा दिया गया। उन्होंने भारत को वैश्विक तकनीकी नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए शिक्षा जगत, सरकार और उद्योग जगत के बीच सहयोगात्मक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सतत विकास और आत्मनिर्भरता केवल मजबूत शोध पारिस्थितिकी तंत्र, दूरदर्शी नीति निर्माण तथा दीर्घकालिक संस्थागत प्रतिबद्धता के माध्यम से ही संभव है। कार्यक्रम का समापन दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. विकास गुप्ता द्वारा धन्यवाद ज्ञापन, राष्ट्रगान तथा हाई-टी के साथ हुआ। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस 2026 के अवसर पर यह आयोजन भारत की वैज्ञानिक उत्कृष्टता, तकनीकी नवाचार एवं समावेशी विकास के प्रति प्रतिबद्धता का प्रभावशाली प्रदर्शन रहा।

IVSK




