सिनेमा का उद्देश्य मनोरंजन के साथ भारतीयता को स्थापित करना भी है: जे. नंदकुमार जी

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उज्जैनी शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल 2026 का भव्य शुभारंभ, भारतीय संस्कृति, परंपरा और गौरवशाली इतिहास को सिनेमा के माध्यम से समाज तक पहुंचाने का आह्वान।

उज्जैन, 24 अक्तूबर 2026। सिनेमा में भारतीयता को स्थापित करने के उद्देश्य से आयोजित उज्जैनी शॉर्ट फ़िल्म फेस्टिवल के चतुर्थ संस्करण का जे. नंदकुमार जी और अभिनेता संजय मेहता जी ने दीप प्रज्ज्वलन कर शुभारम्भ किया। विश्व संवाद केंद्र मालवा एवं सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वाधान में दो दिवसीय उज्जैनी शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल 2026′ का भव्य शुभारंभ सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के स्वर्ण जयंती सभागार में हुआ।

उद्घाटन सत्र में जे. नंदकुमार ने भारतीय सिनेमा के अतीत और वर्तमान में वैचारिक संघर्ष के विभिन्न पक्षों पर बात करते हुए कहा कि सिनेमा का उद्देश्य मोद (आनंद) और बोध के साथ भारतीयता को स्थापित करना भी है। हमारी सभ्यतागत और सांस्कृतिक स्मृतियों को धुँधला करने के लिये षड्यंत्र रचा गया। हमारी फिल्मों में भारत का सत्य सामने आना चाहिये, हमारे गौरवशाली अतीत के चित्रण के साथ ही, वर्तमान विकृतियाँ भी सामने आना चाहिये, परंतु इनका उद्देश्य भी भारत के भाव का संरक्षण ही होना चाहिये। हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सहेजने में हमारे सिनेकर्मियों को आगे आना होगा। पूर्वोत्तर के वीरों से लेकर दक्षिण के महान राजाओं और हमारे जीवन मूल्यों को सिनेमा के माध्यम से समाज के बीच ले जाने का कार्य सिनेकर्मियों को करना होगा।

सिनेमा आज के समय में केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह हमारी सभ्यताओं और सांस्कृतिक स्मृतियों को संजोने तथा उसे पुनर्जीवित करने का एक प्रभावी माध्यम है। आज की युवा पीढ़ी और फिल्मकारों को अपनी माटी, संस्कृति और परंपराओं से जुड़ी सार्थक कहानियां पर्दे पर उतारनी चाहिए।

संजय मेहता जी ने वैचारिक संघर्ष में सिनेमा की भूमिका के महत्व को प्रतिपादित किया। उज्जैनी शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल के प्रथम दिन फिल्म निर्देशक कामाख्या नारायण सिंह ने फिल्म निर्माण और निर्देशन की गहराइयों पर बात करते हुए सिनेमा निर्माण के लिये सामाजिक अनुभूति और सामाजिक उद्देश्य की समझ को आवश्यक बताया। स्क्रीनप्ले लेखक शैलेष प्रताप सिंह ने स्क्रिप्ट लेखन के लिये अध्ययन और शोध के महत्व पर संवाद किया। कहानी के शॉर्ट फिल्म में रूपांतरण की प्रक्रिया पर दिलीप लोकरे ने सत्र को संबोधित किया। शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल में 240 फिल्म प्रविष्टियों में से 35 चयनित फ़िल्मों की स्क्रिनिंग भी की जा रही है।

 

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