देश ही धर्म है: सोंच भारत की और भारत के लिए होना जरुरी

आनंद नरसिम्हन

भारत से जुड़िए, भारत को जोडिये और दुनिया को भारत से जोडिये। हम सब की यह नैतिक जिम्मेदारी है, कर्तव्य है। एक अनुशासन की तरह इसका त्वरित पालन करना अनिवार्य है। सोंच भारत की और भारत के लिए होगी तो भारत, भारतीय और भारतीयता सबका विकास होगा।

कई बार मुझसे पूछा गया है कि आप की विचारधारा क्या है आप लेफ्ट है या राइट या सेंटर? सही मायने में देखा जाए तो ये परिभाषाएं भारत के लिए बिल्कुल उपयुक्त नहीं है। कारण यह है कि भारत में इन शब्दों का प्रयोग अलग परिपेक्ष में किया जाता है। सेकुलर शब्द को ही लीजिए, सेकुलर का सही अर्थ है कि चर्च और स्टेट एक दुसरे से अलग रहेंगें। यह सिद्धांत (कांसेप्ट) ही यूरोप समेत पश्चिम के देशों में शुरू हुआ जब प्रोटेस्टेंट और कैथोलिक चर्च में इस बात को लेकर ठनी की कौन राजा को यानी सरकार को प्रभावित करेगा। राजा या सरकार किसकी बात को सुनेगी।

आज की परिस्थितियों में इस शब्द का अर्थ है कि सरकार और सांप्रदायिक ताकते एक दूसरे से अलग रहेंगे। धार्मिक ताकतों का सरकार में हस्तक्षेप नहीं होगा। लेकिन भारत में सेकुलर शब्द का प्रयोग धर्मनिरपेक्षता के साथ जोड़कर किया जाता है। सेकुलर शब्द का अर्थ ही भारत में दुनिया में प्रचलित कंसेप्ट से अलग है। ऐसे ही नेशनलिस्ट होना जहां पश्चिम में हिटलर की नीतियों और नाजीवाद से देखा जाता है...भारत में इसका प्रयोग भारतीयता और भारतवादी होने की भावना से जोड़कर किया जाता है। भारत में कई हजार वर्षों से सामाजिक अधिकार का सिद्धांत है। सामाजिक अधिकार अर्थात समाज सेवा लेकिन संस्कृति की रक्षा करते हुए जनकल्याण की भावना। लोका समस्था सुखिनो भवंतु, सर्वे संतु निरामया... यह महज कहावतें नहीं बहुत सोची समझी सामाजिक नीतियां है, जो हमारे ज्ञानी – गुणी ऋषि – मुनियों ने राजाओं को सिखाया और अपने राज्य को इन आधारों पर संचालित करने के लिए प्रेरित किया।

आज भारत उसी परंपरा को पुनः जागृत कर आजादी के इस अमृत महोत्सव में अगले 25 सालों में आजादी के अमृत काल का स्वप्न देख रहा है। भारत की यह भूमि हमेशा से विश्व को प्रेरित करती रही है। आज हमें भी भारत वादी होने की आवश्यकता है। हमारा चित उद्देश्य भारत की प्रगति और उन्नति होनी चाहिए। भारत की शक्ति हमसे है तो भारत की उन्नति भी हमसे ही होगी। दुनिया भारत को हमारी नजरों से देखती है। हमारा आचरण, व्यवहार, बोलने का, मिलने का और विश्व से जोड़ने का तरीका भारतीयता से ओतप्रोत होना चाहिए। सोशल मीडिया के इस युग में मेरा सब से अनुरोध है कि हर 10 पोस्ट जो आप अपने लिए करते हैं उसमें से एक पोस्ट आप भारत के लिए करें। भारत का कोई पहलू, तस्वीर, प्रथा, जगह, खान-पान, रहन-सहन कुछ भी हो उसे हाइलाइट करें। सोचिए अगर एक 100 करोड़ से ज्यादा इंटरनेट उपयोग करता हफ्ते में एक पोस्ट भारत के लिए करें तो सोशल मीडिया पर भारत के बारे में कितनी चर्चा होगी? और कितनी बातें दुनिया को हमारे बारे में पता होगी? क्या 1% आंदोलनजीवी तय करेंगे कि भारत के बारे में दुनिया की धारणा क्या होनी चाहिए या फिर 99% भारतवादी? देश के लिए कर्म और देश को अपना सर्वोच्च धर्म मानने का समय आ गया है। आने वाला समय कैसा होगा यह हमें और आपको तय करना है। भारत से जुड़िए, भारत को जोडिये और दुनिया को भारत से जोडिये। हम सब की यह नैतिक जिम्मेदारी है, कर्तव्य है। एक अनुशासन की तरह इसका त्वरित पालन करना अनिवार्य है। सोंच भारत की और भारत के लिए होगी तो भारत, भारतीय और भारतीयता सबका विकास होगा।

भारत माता की जय।

आनंद नरसिम्हन

प्रबंध संपादक, न्यूज़ 18

 

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