भारत की ‘राष्ट्र’ संकल्पना राजनीतिक नहीं, आध्यात्मिकता पर आधारित है – डॉ. मोहन भागवत जी

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सरसंघचालक जी ने कहा कि पश्चिम का ‘अधिकतम लोगों का अधिकतम लाभ’ जैसे सिद्धांत अधूरे समाधान प्रदान करते हैं, जबकि ‘धर्म’ एक समग्र संतुलन देता है। राजा शिबि की कथा का उदाहरण देते हुए स्पष्ट किया कि धर्म हमें सिखाता है कि बड़े समाधानों के लिए स्वयं का त्याग अनिवार्य हो सकता है। समाज से आह्वान किया कि स्वार्थ को त्याग कर एकता और अपनेपन के भाव को अपनाना ही वर्तमान समय की आवश्यकता है।

नई दिल्ली, 24 मार्च 2026। विश्व हिन्दू परिषद, इंद्रप्रस्थ प्रांत के नवीन कार्यालय के भूमि पूजन समारोह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को स्पष्ट करते हुए कहा कि भारत में ‘राष्ट्र’ की अवधारणा केवल एक राजनीतिक व्यवस्था नहीं, बल्कि गहन आध्यात्मिकता पर आधारित है। जहाँ पश्चिमी जगत के लिए ‘स्टेट’ (State) केवल एक प्रशासनिक ढांचा है, वहीं भारतीय इस सत्य को मानता है कि संपूर्ण सृष्टि एक है। हमारे ऋषियों ने भारत को विश्व कल्याण के साधन के रूप में निर्मित किया है, जिसका मूल लक्ष्य “सर्वे सुखिनः सन्तु” है। उन्होंने कहा कि आज सनातन धर्म के पुनर्जागरण का वह समय आ चुका है, जिसकी भविष्यवाणी महर्षि अरविंद ने की थी। राष्ट्र निर्माण की यह प्रक्रिया निरंतर है, जैसे हमने धैर्य और संकल्प के साथ श्री राम मंदिर के निर्माण को साकार होते देखा है।

सरसंघचालक जी ने कहा कि पश्चिम का ‘अधिकतम लोगों का अधिकतम लाभ’ जैसे सिद्धांत अधूरे समाधान प्रदान करते हैं, जबकि ‘धर्म’ एक समग्र संतुलन देता है। राजा शिबि की कथा का उदाहरण देते हुए स्पष्ट किया कि धर्म हमें सिखाता है कि बड़े समाधानों के लिए स्वयं का त्याग अनिवार्य हो सकता है। समाज से आह्वान किया कि स्वार्थ को त्याग कर एकता और अपनेपन के भाव को अपनाना ही वर्तमान समय की आवश्यकता है। विश्व हिन्दू परिषद के उद्देश्यों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि धर्म का प्रसार केवल उपदेशों से नहीं, बल्कि व्यक्तिगत आचरण से संभव है। इसी दिशा में ‘अशोक सिंघल आध्यात्मिक केंद्र’ एक प्रेरक वातावरण के रूप में कार्य करेगा, जो लोगों को आध्यात्मिक चेतना से जोड़कर राष्ट्र के प्रति उनके कर्तव्यों के लिए प्रेरित करेगा। उन्होंने कार्यालय की उपयोगिता, उसके आदर्श चरित्र एवं संगठनात्मक भूमिका पर भी विस्तृत विचार प्रस्तुत किए।

कार्यक्रम की प्रस्तावना व मंच संचालन प्रान्त मंत्री सुरेंद्र गुप्ता ने किया। प्रांत अध्यक्ष कपिल खन्ना ने प्रांत कार्यालय की आवश्यकता एवं महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि स्वयं का कार्यालय स्थापित होने से संगठनात्मक गतिविधियों को गति मिलेगी तथा कार्यकर्ताओं को विभिन्न कार्यक्रमों के संचालन में अधिक सुविधा होगी।

भूमि पूजन कार्यक्रम में शारदा पीठ के शंकराचार्य श्री राजराजेश्वर महाराज ने पुण्य कार्य के लिए शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए प्रांत कार्यालय की स्थापना को संगठन के लिए एक महत्वपूर्ण एवं प्रेरणादायी कदम बताया। कार्यक्रम श्रद्धा, अनुशासन एवं संगठनात्मक एकता के वातावरण में संपन्न हुआ।

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इंद्रप्रस्थ संवाद - नवीन अंक