वनवासी कल्याण आश्रम एवं वन बंधु मीडिया फाउंडेशन द्वारा प्रकाशित ‘जनजाति सांस्कृतिक समागम विशेषांक’ का विमोचन इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के ‘समवेत’ सभागार में किया गया।
नई दिल्ली, 19 सितम्बर 2026। वनवासी कल्याण आश्रम एवं वन बंधु मीडिया फाउंडेशन द्वारा प्रकाशित ‘जनजाति सांस्कृतिक समागम विशेषांक’ का विमोचन इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के ‘समवेत’ सभागार में किया गया। विशेषांक में जनजाति सांस्कृतिक समागम के विविध पक्षों, प्रमुख वक्तव्यों तथा जनजातीय समाज के कीर्ति पुरुषों के जीवन और योगदान को संकलित किया गया है।
कार्यक्रम की शुरुआत ‘संकल्प करें, कृतिशील बनें’ गीत के साथ हुई। कार्यक्रम अध्यक्ष ने वनवासी कल्याण आश्रम के प्रति आभार व्यक्त करते हुए विशेषांक की विषयवस्तु पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने जनजाति सांस्कृतिक समागम की अभूतपूर्व सफलता की सराहना करते हुए कहा कि इस विशेषांक के माध्यम से पूरे आयोजन का दस्तावेजीकरण करने का प्रयास किया गया है। इसमें समागम के दौरान हुए प्रमुख भाषणों का संकलन करने के साथ ही जनजातीय समाज के कीर्ति पुरुषों के जीवन और उनके योगदान पर केंद्रित आलेखों को भी स्थान दिया गया है।
इस अवसर पर अंजू जी ने ‘जन-जन जिनकी पूजा करते, वनांचल के देव हमारे’ गीत की भावपूर्ण एकल प्रस्तुति दी।
भगवान सहाय जी ने कहा कि भारत के वन प्राचीन काल से ज्ञान-विज्ञान के केंद्र रहे हैं और समरसता भारतीय समाज का ध्येय रही है। उन्होंने कहा कि वनवासी समाज का संघर्ष बहुत लंबा रहा है। अपने गौरवशाली इतिहास से दूर होने के कारण समाज में आत्मविस्मृति की स्थिति भी उत्पन्न हुई है। ऐसे में जनजातीय समाज को उसके गौरवपूर्ण इतिहास, परंपराओं और महापुरुषों के योगदान से परिचित कराना अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने वनयोगी बालासाहब देशपांडे का स्मरण करते हुए कहा कि जनजातीय समाज को उसके गौरवशाली इतिहास की याद दिलाने से उसमें आत्मविश्वास और स्वाभिमान का भाव मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि ‘जागृत वनवासी, समर्थ भारत’ के ध्येय के साथ वनवासी कल्याण आश्रम निरंतर कार्य कर रहा है। आश्रम व्यक्तित्व निर्माण, संस्कार निर्माण और धर्म की सेवा के साथ-साथ जनजातीय समाज की संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों के संरक्षण के लिए भी संकल्पबद्ध है।
केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री दुर्गादास उइके ने कहा कि वनवासी कल्याण आश्रम के सतत प्रयासों से दिल्ली में भव्य जनजाति सांस्कृतिक समागम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। उन्होंने जनजातीय समाज के बीच होने वाले धर्मांतरण के विषय का भी उल्लेख किया और उसकी संस्कृति, आस्था तथा परंपराओं के संरक्षण पर बल दिया।
भारत की प्रगति केवल भौतिक नहीं, बल्कि वैचारिक और सांस्कृतिक स्तर पर भी होगी। देश की एकता और अखंडता को सुदृढ़ करते हुए इस लक्ष्य की प्राप्ति में वनवासी कल्याण आश्रम भी अपने स्तर पर निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने जनजाति सांस्कृतिक समागम के विचारों, अनुभवों और उपलब्धियों को विशेषांक के रूप में संकलित करने के प्रयास की सराहना करते हुए इसके प्रकाशन से जुड़े सभी लोगों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।
कार्यक्रम का समापन ‘वंदे मातरम्’ के साथ हुआ।

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