दुर्भाग्य से संविधान लागू होने के 73 वर्ष वाद भी देश में समान नागरिक संहिता लागू नहीं हो पाया है। विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, संपति इत्यादि से संबंधित कानून सबके लिए एक समान नहीं बल्कि अलग – अलग धर्मों के लिए अलग - अलग है।
26 जनवरी 2023 को भारत अपना 74वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान लागू हुआ यानी भारत में लोकतंत्र स्थापित हुआ, कानून का राज स्थापित हुआ, भारत के लिए भारत के लोगों द्वारा बनाया गया कानून लागू हो गया। 26 जनवरी 2023 को भारत में लोकतंत्र एवं कानून का राज स्थापित हुए 73 वर्ष पूरा हो गए। लोकतंत्र एवं कानून का राज यानी सबके लिए सामान कानून एवं कानून के सामने सब एक सामान बिना किसी भेदभाव के। लेकिन क्या यह वास्तविकता है? क्रिमिनल (फौजदारी) कानून तो देश के सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होता है, लेकिन सिविल (दीवानी) कानून के साथ ऐसा नहीं। दुर्भाग्य से संविधान लागू होने के 73 वर्ष वाद भी देश में समान नागरिक संहिता लागू नहीं हो पाया है। विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, संपति इत्यादि से संबंधित कानून सबके लिए एक समान नहीं बल्कि अलग – अलग धर्मों के लिए अलग - अलग है। उदाहरण के लिए अगर आप हिन्दू महिला है तो विवाह विच्छेद के बाद आपको गुजारा भत्ता मिलेगा लेकिन अगर आप मुस्लिम महिला है तो तलाक के बाद आपको गुजारा भत्ता नहीं मिलेगा। इस तरह का भेदभाव पूर्ण व्यवस्था सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं की जानी चाहिए।
उसी तरह मौलिक एवं धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर भी भेदभाव पूर्ण व्यवस्था नहीं होनी चाहिए। हिन्दुओं को भी अपने मंदिरों एवं धार्मिक गतिविधियों को लेकर वही अधिकार मिलने चाहिए जो बाकि धर्मों को प्राप्त है। उदाहरण के लिए पूजा स्थलों एवं उनके खजाने पर सरकारी नियंत्रण की बात करें को मंदिर एवं उनके खजाने पर तो सरकार का नियंत्रण है लेकिन मस्जिद, गुरुद्वारा एवं चर्च तथा उनके खजाने पर सरकार का नियंत्रण नहीं है। मंदिर तथा उससे जुड़े संस्थानों के आय तो आयकर के दायरे में आते है लेकिन मस्जिद, गुरुद्वारा एवं चर्च तथा उनसे जुड़े संस्थानों के आय आयकर के दायरे में नहीं आते है। हिन्दू संस्थाओं द्वारा चलाए जा रहे शिक्षण संस्थानों में तो सरकार का हस्तक्षेप होता है लेकिन बाकि किसी धर्म द्वारा चलाए जा रहे शिक्षण संस्थानों में सरकार का हस्तक्षेप नहीं होता है। हिन्दु धर्म स्थलों के प्रबंधन को छोड़कर बाकि सभी धर्मों के धार्मिक स्थलों के प्रबंधन में उस धर्म के धर्मावलम्बियों का हस्तक्षेप होता है।
आखिर इस तरह का क़ानूनी भेदभाव एक लोकतांत्रिक देश में कैसे स्वीकार की जा सकती है। अतः इस गणतंत्र दिवस पर हमें इस तरह के सभी भेदभाव को समाप्त कर सभी के लिए समान कानून एवं समान अधिकार का संकल्प लेना चाहिए।
जय हिन्द।

बिपीन कुमार तिवारी




