सरस्वती वंदना

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सरस्वती वंदना

सरस्वती वंदना

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता।

या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥

या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।

सा मामं पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥1॥

 

शुक्लाम् ब्रह्मविचार-सार-परमाम् आद्यां जगद्व्यापिनीम्।

वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्॥

हस्ते स्फटिकमालिकां विदधतीम् पद्मासने संस्थिताम्।

वन्दे तां परमेश्वरीम् भगवतीम् बुद्धिप्रदाम् शारदाम्॥2॥

 

 

सरस्वती उपासना मंत्र

सरस्वती नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणी, विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु मे सदा।

 

 

गीत

सरस्वती नमस्तुभ्यं

वरदे कामरूपिणी

विद्यारम्भं करिष्यामि

सिद्धिर्भवतु मे सदा

 

माँ शारदे कहाँ तू

वीणा बजा रही हैं

किस मंजु ज्ञान से तू

जग को लुभा रही हैं

 

किस भाव में भवानी

तू मग्न हो रही है

विनती नहीं हमारी

क्यों माँ तू सुन रही है

हम दीन बाल कब से

विनती सुना रहें हैं

चरणों में तेरे माता

हम सर झुका रहे हैं

हम सर झुका रहे हैं

माँ शारदे कहाँ तू

वीणा बजा रही हैं

किस मंजु ज्ञान से तू

जग को लुभा रही हैं

 

अज्ञान तुम हमारा

माँ शीघ्र दूर कर दो

द्रुत ज्ञान शुभ्र हम में

माँ शारदे तू भर दे

बालक सभी जगत के

सूत मात हैं तुम्हारे

प्राणों से प्रिय है हम

तेरे पुत्र सब दुलारे

तेरे पुत्र सब दुलारे

मां शारदे कहाँ तू

 

हमको दयामयी तू

ले गोद में पढ़ाओ

अमृत जगत का हमको

माँ शारदे पिलाओ

मातेश्वरी तू सुन ले

सुंदर विनय हमारी

करके दया तू हर ले

बाधा जगत की सारी

बाधा जगत की सारी

माँ शारदे कहाँ तू

वीणा बजा रही हैं

किस मंजु ज्ञान से तू

जग को लुभा रही हैं

माँ शारदे कहाँ तू

वीणा बजा रही हैं

किस मंजु ज्ञान से तू

जग को लुभा रही हैं

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