जब तक बेटी सही सलामत घर नहीं लौट आती परिवार वालों को चिंता लगी रहती है। अगर हम कुछ उपायों को अपना लें और अपनी बेटियों से इस बारे में खुलकर बातचीत करें तो बहुत हद तक हम सभी की चिंता कम हो सकती है।
हमारे देश का कानून लड़के और लड़की के बीच कोई भेदभाव नहीं करता। मगर हम अपनी बालिकाओं की सामाजिक सुरक्षा के प्रति चिंतित रहते हैं। हमारे समाज का मध्यमवर्गीय एवं गरीब वर्ग अपनी बेटियों के घर से बाहर जाकर काम करने अथवा पढ़ाई करने के समय हमेशा चिंता में रहता है। जब तक बेटी सही सलामत घर नहीं लौट आती परिवार वालों को चिंता लगी रहती है। अगर हम कुछ उपायों को अपना लें और अपनी बेटियों से इस बारे में खुलकर बातचीत करें तो बहुत हद तक हम सभी की चिंता कम हो सकती है।
बेटियों से खुलकर करें चर्चा
-बेटियों को साइबर सिक्योरिटी के बारे में बताएं। किसी भी अनजान कॉल को रिसीव करने से मना करें।
-बेटियों से कहें किसी भी मिस्स कॉल को रिडॉयल न करें।
-कॉलेज अथवा स्कूल जाते वक्त ग्रुप में जाएं। बस में यात्रा करते वक्त अगर कोई असुविधा या छेड़छाड़ का भय लगे तो फौरन मार्शल से शिकायत करें।
-किसी भी अनजान व्यक्ति से कभी लिफ्ट न लें। किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ अपना नंबर शेयर न करें।
-अपने इलाके के पुलिस स्टेशन में संपर्क कर महिला सुरक्षा प्रशिक्षण शिविर में हिस्सा लें।
-इंटरनेट का इस्तेमाल करते वक्त सतर्क रहे और किसी भी अनजान एप्लीकेशन को डॉउनलोड न करें।
-किसी भी नौकरी के ऑफर के बारे में अपने परिवार के लोगों को जरूर बताएं।
-फेसबुक पर किसी पहचान छिपाने वाले के फ्रेंडशिप न करें।
-कॉलेज, स्कूल अथवा दफ्तर या फैक्ट्री में कामकाज के दौरान अगर कोई गलत व्यवहार करें तो वहां के बड़े कर्मचारियों को बताएं और घर आकर परिवार के साथ अपनी बातचीत को साझा करें।
-इंटरनेट पर किसी को भी लाइक न करें और न कोई कमेंट करें। केवल अपनी सहेलियों के साथ ही चैट करें।
-स्मार्ट फोन पर अगर कोई बुलिंग करने का प्रयास करें तो माता-पिता को बताएं और पास के पुलिस स्टेशन में ऑन लाइन शिकायत दर्ज करें।
-अपनी प्रोफाइल को अपने परिवार वालों तक ही सीमित रखें। अपने पारिवारिक समारोह के फोटो इंटरनेट पर शेयर न करें।
-दिल्ली पुलिस का महिला हेल्पलाइन 1090 पर किसी भी सहायता के लिए फोन कॉल करें।
-दिल्ली मेट्रो में सफर के समय महिला किसी भी सहायता के लिए 155370 पर फोन कॉल करें।
-दिल्ली में बस ऑटो अथवा कैब में सफर के दौरान महिलाएं 8376050050 पर फोन कॉल करें।
-किसी भी कानूनी सहायता के लिए लीगल हेल्पलाइन नंबर 1516 पर कॉल करें।
-बेटियां अपने स्मार्टफोन में दिल्ली पुलिस के हिम्मत प्लस एप को डॉउनलोड करके रखें।
हमारी बेटियों की सुरक्षा सर्वोपरी है। उन्हें सम्मान और गरिमा के साथ जीवन जीने का अधिकार है। अपनी बेटियों को अपने परिवार के संस्कार और धार्मिक मान्यताओं से अवगत कराए। बेटियों को उनकी जिम्मेदारी के बारे में बताएं। नाम बदल कर रहने वाले व्यक्तियों से हमेशा सतर्क रहें। किसी भी अन्य धर्म के व्यक्ति अथवा लड़की के साथ दोस्ती न करें। पार्लर, डिलीवरी बॉय, लोकल दुकानदार, डिशवाले अथवा किसी शोरुम वाले को अपना नंबर शेयर न करें। लिव-इन में रहने वाले जोड़ो से दूर रहने का प्रयास करें। फोन पर अगर कोई परेशान करें तो घरवालों को जरूर बताएं। अपने धार्मिक कार्यक्रमों में दूसरे धर्म के लोगों को आमंत्रित न करें। अपनी बेटियों को लव-जिहाद की शिकार बच्चियों के बारे में बताएं। बेटियों को आगे बढ़ने, कामकाज करने, पढ़ने और सामाजिक-धार्मिक कार्य करने के लिए सहयोग दें और उत्साहित करें। अपनी बस्ती, मोहल्ले में महिला टोली बनाएं। पड़ोस में बिना पुलिस वैरिफिकेशन के रहने वाले किराएदार की सूचना बीट कांस्टेबल को दें। हमें अपनी बेटियों को निडर, स्वाभीमानी और सशक्त बनाना है। इसलिए उन्हें सामाजिक सुरक्षा के उपाए बराबर समझाते रहें।

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