विक्टिम शेमिंग के बजाय अपने आसपास के खतरों को पहचान कर हमें अपनी बच्चे बच्चियों को इसको लेकर जागरूक करने की जरुरत है। आप यह तभी कर सकते है जब आपका अपने बच्चों के साथ निरंतर संवाद कायम हो। आप उनके साथ समय बिताते हो और अच्छे बुरे का बोध कराते हो।
दिल्ली पुलिस ने दिल्ली के मेहरौली क्षेत्र में हुए एक ऐसे हत्याकांड का खुलासा किया जो सबकी रोंगटे खड़े कर देने वाले था। लगभग 6 महीने पहले आफताब अमीन पूनावाला नाम के मुस्लिम बॉयफ्रेंड ने अपनी हिन्दू प्रेमिका श्रद्धावाकर की हत्या कर दी और लाश ठिकाने लगाने के लिए उसके शरीर के 35 टुकड़े किए। वह हर रोज़ 18 दिनों तक रात दो बजे घर से निकलता और शव के कुछ टुकड़ों को मेहरौली के जंगल में फेकने के लिए जाता। वह शव के टुकड़ों के घर में फ्रीज़ में कई दिन तक रखा रहा।
आफताब और श्रद्धा दोनों मुंबई के रहने वाले थे तथा श्रद्धा अपने परिवार के विरोध के बाद अपने परिवार से संबंध तोड़कर आफताब के साथ लिवइन में रह रही थी। इस घटना ने हिन्दू समाज की महिलाओं के सामने मडराते जिहादी खतरे को एकबार फिर सबके सामने खोलकर रख दिया है।
इस घटना ने हिन्दू समाज के सामने दो चुनौतियों को उजागर किया है। पहला है अपनी महिलाओं को लव जिहाद के खतरे से बचना और दूसरा है अपने परिवार के बच्चों की परवरिश एवं संस्कारों को ठीक करना।
आफताब ने मात्र श्रद्धा की हत्या नहीं की है अपितु उन सभी लड़कियों के माता पिता की शिक्षा व् संस्कारो की भी है। सेक्युलरिसिम एवं आधुनिकता के नाम पर अपनी बच्चियों को जिहादी खतरों से सतत सतर्क करने के बजाय उनके बीच छोड़ देने वाले माता पिता को अपनी आखें खोल लेनी चाहिए। लिव इन रिलेशनशिप समाज के लिए विशेषकर हिन्दू समाज की युवा लड़कियों के लिए सबसे बड़ा खतरा बनकर सामने आया है।
जब भी इस प्रकार की निर्मम हत्या जिहादियों तत्वों द्वारा की जाती है तो समाज लड़की को चरित्रहीन घोषित कर देता है या अपराधी के अपराध की मूल भावना जिहादी मानसिकता से न जोड़कर उसको मानसिक रोगी होने का प्रमाण पत्र दे देता है।
आप ऐसा करने से बचे। आपको शायद मालूम न हो की वह कितने बड़ी राष्ट्रीय – अंतरराष्ट्रीय साजिस का शिकार हुई है। जिसका एक ही उद्देश्य है हिन्दू समाज पर हमला और उसका सबसे आसन शिकार है महिलाएं। बॉलीवुड भी उसी साजिस का एक हिस्सा है।
अतः विक्टिम शेमिंग के बजाय अपने आसपास के खतरों को पहचान कर हमें अपनी बच्चे बच्चियों को इसको लेकर जागरूक करने की जरुरत है। आप यह तभी कर सकते है जब आपका अपने बच्चों के साथ निरंतर संवाद कायम हो। आप उनके साथ समय बिताते हो और अच्छे बुरे का बोध कराते हो। उसके दोस्तों के बारे में जानकारी रखे। अगर किसी कारण से आपकी बच्ची के पैर लडखडा जाते है तो संबंध विच्छेद न करे बल्कि निरंतर संपर्क एवं संबंध बनाए रखे और कोशिश करें की वह आपकी बात को समझे और वापस आ जाए। अगर आप संबंध एवं संपर्क तोड़ लेंगे तो वह और ज्यादा खतरे में हो जाएगी।

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