गाजियाबाद के वीवीआईपी नेहरू स्टेडियम में 15 दिवसीय आवासीय संघ शिक्षा वर्ग (सामान्य) का प्रकट समारोह सम्पन्न हुआ। मेरठ प्रांत के 28 क्षेत्रों से आए 518 शिक्षार्थियों ने अनुशासन, सेवा, व्यक्तित्व निर्माण और राष्ट्र प्रथम के संस्कारों का प्रशिक्षण प्राप्त किया।
गाजियाबाद, 21 जून 2026। दुर्गावती हेमराज सरस्वती विद्या मन्दिर में आयोजित 15 दिवसीय आवासीय संघ शिक्षा वर्ग (सामान्य) का वीवीआईपी नेहरू स्टेडियम, नेहरू नगर, गाजियाबाद में प्रकट समारोह का आयोजन किया गया। 6 जून 2026 (ज्येष्ठ कृष्ण षष्ठी) से प्रारंभ हुए प्रशिक्षण शिविर में मेरठ प्रांत के 28 संगठनात्मक क्षेत्रों से आए 518 शिक्षार्थियों ने साधनारत रहकर अनुशासन, समयबद्धता और सेवा का मूलमंत्र सीखा।
15 दिवसीय वर्ग वास्तव में ‘संस्कार की पाठशाला’ है, जहाँ शिक्षार्थियों के सर्वांगीण विकास पर ध्यान केंद्रित किया गया। वर्ग का उद्देश्य केवल शारीरिक रूप से सुदृढ़ करना नहीं, बल्कि बौद्धिक सत्रों के माध्यम से स्वयंसेवकों के अंतर्मन में राष्ट्र प्रथम के भाव को स्थायी रूप से जाग्रत करना है।
समापन समारोह में स्वयंसेवकों ने पूर्ण समता (मार्च पास्ट) का प्रदर्शन किया। शिक्षार्थियों ने सामूहिक योग, प्राणायाम, निहत्थे आत्मरक्षा की प्राचीन भारतीय पद्धति नियुद्ध और दण्ड (लाठी) संचालन के विभिन्न कौशल, व्यूह रचनाओं का प्रदर्शन किया। मुख्य आकर्षण 107 शिक्षार्थियों के घोष दल का सामूहिक वादन रहा।
समारोह के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पश्चिम उत्तर प्रदेश क्षेत्र के क्षेत्र प्रचारक महेन्द्र जी ने कहा कि “संघ अपने शताब्दी वर्ष की यात्रा पूर्ण कर देश को परम वैभव पर ले जाने की साधना में निरंतर संलग्न है। संघ शिक्षा वर्ग का मूल उद्देश्य समाज के भीतर की सुप्त शक्ति को जगाकर राष्ट्र निर्माण के लिए चरित्रवान कार्यकर्ता तैयार करना है। जब समाज जाति, भाषा और संकीर्ण बंधनों से मुक्त होकर संगठित होगा, तभी भारत दुनिया का नेतृत्व कर सकेगा। यहाँ सीखे गए अनुशासन, सांस्कृतिक गौरव और ‘राष्ट्र प्रथम’ के भाव को प्रत्येक स्वयंसेवक अपने दैनिक जीवन में उतारे और समाज परिवर्तन का माध्यम बने।”
उन्होंने कहा कि हिन्दू धर्म और संस्कृति चिर पुरातन नित्य नूतन है। उच्चतम न्यायालय, भारतीय संसद, और सभी सेनाओं के ध्येय वाक्य संस्कृत में ही हैं और कुछ लोग हिन्दू धर्म की बात करने पर सांप्रदायिकता की बात उठाने लगते हैं जो सर्वथा अनुचित है। संघ 100 वर्ष पूर्ण करने के बाद भी नित्य नूतन बना हुआ है। जब भी विश्व को योग, शांति और सुशासन के मार्ग की आवश्यकता होती है, उसे भगवत गीता की ओर देखना पड़ता है। समरसता, परिवार प्रबोधन, पर्यावरण, स्व व नागरिक कर्तव्यों की बात करते हुए शताब्दी वर्ष में संघ द्वारा चलाये जा रहे पंच परिवर्तन अभियान को समाज से अपनाने का आग्रह किया।
कार्यक्रम अध्यक्ष भारतीय वायु सेना के सेवानिवृत्त एयर वाइस मार्शल अनिल तिवारी जी (विशिष्ट सेवा मेडल, वायु सेवा मेडल) ने स्वयंसेवकों के अनुशासन की सराहना की। उन्होंने कहा – “एक सैनिक के रूप में मैंने सीमाओं पर कड़ा अनुशासन देखा है, लेकिन आज आम नागरिकों के बीच युवाओं के सांगठनिक अनुशासन और दृढ़ संकल्प को देखकर मेरा विश्वास और सुदृढ़ हो गया है। किसी भी राष्ट्र की सुरक्षा केवल सीमाओं पर तैनात सेना के बल पर नहीं, बल्कि देश के भीतर रहने वाले नागरिकों के अनुशासित चरित्र और सजगता पर निर्भर करती है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जिस प्रकार युवाओं को संस्कारवान, मानसिक रूप से सुदृढ़ और देशप्रेमी बना रहा है, वह सराहनीय है और देश की वास्तविक सुरक्षा की रीढ़ है।”
वर्ग में मेरठ पूर्व, मेरठ पश्चिम, हापुड़, सरधना, मवाना, लक्ष्मीनगर, शामली, बागपत, सहारनपुर, बेहट, देवबंद, बिजनौर, धामपुर, रामपुर, मुरादाबाद, ठाकुरद्वारा, संभल, अमरोहा, बबराला, बुलंदशहर, खुर्जा, अनूपशहर, गौतमबुद्धनगर, नोएडा, गाजियाबाद महानगर, वैशाली, हरनंदी तथा गाजियाबाद जिला सहित कुल 28 सांगठनिक क्षेत्रों के 518 शिक्षार्थियों ने सहभागिता की। शिविर के सुचारू संचालन, आवास और भोजन व्यवस्था में 200 से अधिक कार्यकर्ता दिन-रात जुटे रहे।
कार्यक्रम के अंत में शिविर को सुचारू रूप से संपन्न कराने में सहयोग देने वाले सभी स्थानीय नागरिकों, व्यवस्था कार्यकर्ताओं और विद्यालय प्रबंधन का हृदय से आभार व्यक्त किया गया।

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