राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य भय्याजी जोशी ने कहा कि शरीर के स्वस्थ होने से अधिक जरुरी है मन का स्वस्थ होना। क्योंकि मन का प्रभाव शरीर पर पड़ता है। इसलिए भविष्य में शरीर के साथ साथ मन के स्वास्थ्य का भी विचार करे, ऐसी पद्धति के लिए हमें सोचना चाहिए।
उदयपुर, 17 जुलाई 2026। उदयपुर स्थित सेवा भारती परिसर, हरिदास जी की मगरी में प्राकृतिक आरोग्य केंद्र का शुभारम्भ एवं सेवा भारती की वेबसाइट का लोकार्पण राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य भय्याजी जोशी ने किया। उन्होंने कहा कि “भारतीय प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति रोगों के निदान पर कार्य करती है। इसे वैकल्पिक नहीं, बल्कि समानान्तर चिकित्सा पद्धति के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए।” उन्होंने जलवायु क्षेत्रों के अनुसार स्वास्थ्य चिंतन करने वाले संगठनों की आवश्यकता पर भी बल दिया।
समारोह में मुख्य अतिथि राजस्थान सरकार के उप मुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा, विशिष्ट अतिथि पेसिफिक मेडिकल कॉलेज के अध्यक्ष राहुल अग्रवाल व धरोहर चेरिटेबल फाउंडेशन के निदेशक संजय सिंघल रहे। केंद्र पर योग, प्राणायाम, आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा, एक्यूप्रेशर, स्पाइनल बाथ, फिजियोथेरेपी सहित प्राकृतिक उपचार एवं स्वास्थ्य परामर्श सेवाएँ उपलब्ध रहेंगी।
भय्याजी जोशी ने कहा कि शरीर के स्वस्थ होने से अधिक जरुरी है मन का स्वस्थ होना। क्योंकि मन का प्रभाव शरीर पर पड़ता है। अस्वस्थ मन को ठीक करने के लिए ना तो किसी प्रकार की दवाई है और ना कोई चिकित्सा उसके लिए आवश्यक है। इसलिए भविष्य में शरीर के साथ साथ मन के स्वास्थ्य का भी विचार करे, ऐसी पद्धति के लिए हमें सोचना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सम्पूर्ण विश्व के स्वास्थ्य का चिंतन केवल एक संस्था विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) कर सके, यह असंभव है। हर देश हर समाज की परम्पराएं व मान्यताएं अलग हैं, खान-पान भिन्न है, जलवायु भिन्न है। परन्तु इन सभी के स्वास्थ्य का चिंतन केवल एक संगठन करे, यह अवैज्ञानिक है। अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए क्लाइमेट जोन के अनुसार बड़ी मात्रा में ऐसे संगठन बनाए जाने चाहिए ।
गीता प्रेस गोरखपुर की मासिक पत्रिका “कल्याण“ के एक लेख का संदर्भ देते हुए भय्याजी जोशी ने कहा कि भारत में चलने वाली 150 चिकित्सा पद्धतियों का वर्णन आया है। किसी चिकित्सा पद्धति में किसी रोग विशेष का उपचार नहीं है और किसी अन्य चिकित्सा पद्धति में किसी दूसरे रोग का उपचार नहीं मिल सकता, तो इस प्रकार अपूर्ण चिकित्सा पद्धतियां मिलकर पूर्ण करने का विचार करना चाहिए। इसलिए भारत में सब प्रकार की चिकित्सा पद्धतियों का स्वागत किया जाता है।
उन्होंने कहा कि जिन्हें सुपर स्पेशलिटी चिकित्सालय के नाम से जानते हैं, उसमें देश की केवल 10 प्रतिशत जनता ही लाभान्वित होती है। सामान्य व्यक्ति की पहुंच में नहीं है। स्वास्थ्य सेवा गुणात्मक के साथ साथ अफोर्डेबल भी हो। ऐसा विचार सभी निजी चिकित्सालयों, सेवा चिकित्सालयों को करना चाहिए।
मुख्य अतिथि राजस्थान सरकार के उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा ने कहा कि योग शरीर व विचार को सकारात्मक बनाता है। मानव जीवन का उद्देश्य मानव का कल्याण है। सेवा भारती बिना प्रचार के अंतिम व्यक्ति तक सेवा पहुंचाती है। समाज के बीच जाकर सेवा भाव से कार्य करती है। सेवा का अर्थ दूसरे के दु:खों को अपना दुःख मानना और जीवन को राष्ट्र के लिए उपयोगी बनाना है। नर सेवा ही नारायण सेवा है। जब हम स्वास्थ्य के प्रति सजग होंगे, परिवार में संस्कार होंगे, जरुरतमंद की सेवा करेंगे और जाति से ऊपर उठकर विचार करेंगे तो हम भी राष्ट्र निर्माण के कार्य में सहयोग कर सकेंगे।
सवीना स्थित बाल संस्कार केंद्र की बालिकाओं ने ‘निर्मल पावन भावना सभी के सुख की कामना, गौरवमय समरस जीवन यही राष्ट्र की कामना’, गीत प्रस्तुत किया। कार्यक्रम से पूर्व सेवा भारती की ओर से चलाये जा रहे सेवा कार्यों पर आधारित फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया।

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