संघ की रचना के 31 जिलों के कुल 743 स्वयंसेवक तीनों वर्गों में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। इनमें शिवपुरी में 369 स्वयंसेवक शामिल हुए हैं। ब्यावरा में 200 और बैतूल में 174 स्वयंसेवक प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।
भोपाल, 17 मई 2026। मध्यभारत प्रांत के विद्यार्थी कार्यकर्ताओं के लिए शिवपुरी में, तरुण व्यवसायी कार्यकर्ताओं के लिए ब्यावरा में और 40 से अधिक आयुवर्ग के कार्यकर्ताओं के लिए बैतूल में संघ शिक्षा वर्गों का आयोजन किया जा रहा है। तीनों ही स्थानों पर संघ शिक्षा वर्गों का औपचारिक उद्घाटन 17 मई को हुआ। संघ शिक्षा वर्ग में शामिल शिक्षार्थियों को शारीरिक, बौद्धिक, योग, सेवा, प्रबंधन और संघ कार्य का प्रशिक्षण प्राप्त होगा। संघ का कार्य व्यक्ति निर्माण का कार्य है। 15 दिन के वर्ग में कार्यकर्ता कठोर अनुशासित दिनचर्या का पालन करते हुए अपने व्यक्तित्व को सुदृढ़ करेंगे।
शिवपुरी के सरस्वती विद्यापीठ आवासीय विद्यालय फतेहपुर में संघ शिक्षा वर्ग (विद्यार्थी) का आयोजन किया जा रहा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, मध्यभारत के प्रांत प्रचारक विमल गुप्ता ने शिवपुरी में संघ शिक्षा वर्ग के उद्घाटन सत्र में कहा कि संघ शिक्षा वर्ग एक साधना स्थली है, जहाँ शिक्षार्थी साधक के रूप में नित्य शारीरिक, बौद्धिक एवं व्यवस्थात्मक प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं। यह सभी प्रशिक्षण मन की साधना से ही संभव हैं।
उन्होंने कहा कि संघ शताब्दी वर्ष में कार्य विस्तार एवं कार्य के दृढ़ीकरण हेतु प्रशिक्षण प्राप्त करना सौभाग्य का विषय है। वर्ग में प्रशिक्षण प्राप्त करने से समूह में काम करने का स्वभाव बनता है। संघ के वैचारिक अधिष्ठान की स्पष्टता होती है। साथ ही, समय प्रबंधन, आत्मविश्वास, संवेदना, स्वावलंबन और अनुशासन जैसे गुणों का विकास होता है। उन्होंने कहा कि वर्ग में 24 घंटे की व्यस्ततम दिनचर्या में स्वयं को व्यस्त रखते हुए सीखने के मानस से शिक्षार्थी प्रशिक्षण प्राप्त करता है। उन्होंने कहा कि संघ शिक्षा वर्ग में शिक्षार्थी विभिन्न प्रकार के प्रबंधन भी सीखता है, जैसे – समय प्रबंधन, मानव प्रबंधन, वित्तीय प्रबंधन, संसाधन प्रबंधन, आपदा प्रबंधन और कार्यक्रम प्रबंधन आदि।
वर्ग केवल प्रशिक्षण नहीं, स्वयं को गढ़ने का अवसर – डॉ. राजेश सेठी
ब्यावरा में व्यवसायी कार्यकर्ताओं के संघ शिक्षा वर्ग के उद्घाटन सत्र में सह प्रांत संघचालक डॉ. राजेश सेठी ने कहा कि संघ शिक्षा वर्ग व्यक्ति के कौशल विकास, व्यक्तित्व निर्माण और वैचारिक स्पष्टता का केंद्र है। अच्छे कार्यकर्ता बनने के लिए केवल शारीरिक क्षमता पर्याप्त नहीं, बल्कि बौद्धिक और भावनात्मक विकास भी आवश्यक है। यही कारण है कि संघ शिक्षा वर्ग में तीनों आयामों पर समान रूप से काम किया जाता है। ‘राष्ट्र प्रथम’ केवल नारा नहीं, बल्कि जीवन का मूल भाव होना चाहिए। उन्होंने कहा कि संघ की कार्यपद्धति वैज्ञानिक, अनुशासित और पूर्ण है, जो भारत को परम वैभव तक पहुंचाने में सक्षम है। इस अवसर पर मंच पर सर्वाधिकारी योगेश गौतम उपस्थित रहे।
डॉ. राजेश सेठी ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में भारत के पास वह सांस्कृतिक और आध्यात्मिक शक्ति है, जो पूरे विश्व को विनाश से बचाने का मार्ग दिखा सकती है। भारतीय दर्शन ‘विश्व कल्याण’ और ‘धर्म की जय’ की बात करता है। धर्म के अनुरूप राज्य व्यवस्था और समाज व्यवस्था ही विश्व शांति और कल्याण का आधार बन सकती है।
शारीरिक एवं आध्यात्मिक विकास में सहायक हैं वर्ग – अशोक पांडेय
बैतूल स्थित भारत भारती विद्यालय परिसर में संघ शिक्षा वर्ग (विशेष) उद्घाटन सत्र में सर्वाधिकारी कविंद्र कियावत, प्रांत संघचालक अशोक पांडेय ने भारत माता की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर वर्ग का शुभारंभ किया। वर्ग में 40 वर्ष से अधिक आयु के स्वयंसेवक ही अपेक्षित हैं।
अशोक पांडेय ने कहा कि संघ शिक्षा वर्ग एक साधना है जो शिक्षार्थियों के शारीरिक एवं आत्मिक विकास में सहायक है। साधना कठिनता से सफल होती है। जो कठिनाइयों में जी नहीं सकता, वह कभी साधक नहीं बन सकता है। अपने संघ कार्य को मजबूती देने के लिए हम इस वर्ग में प्रशिक्षण ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज संघ जिस सफलता के शिखर पर है, उसके पीछे कई पीढियों की अनथक साधना है। गीता का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि गीता के छठे अध्याय के 35वें श्लोक में भगवान श्री कृष्ण ने मन को बड़ा चंचल बताया है और कहा है – निरंतर अभ्यास से ही मन को नियंत्रित किया जा सकता है। समाज में शाखा की भूमिका जागरण श्रेणी के माध्यम से स्पष्ट हो सके और शाखा समाज परिवर्तन का केंद्र बन सके, इसलिए हम वर्ग में प्रशिक्षण लेने आए हैं।
31 जिलों के 743 स्वयंसेवक ले रहे प्रशिक्षण
संघ की रचना के 31 जिलों के कुल 743 स्वयंसेवक तीनों वर्गों में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। इनमें शिवपुरी में 369 स्वयंसेवक शामिल हुए हैं। ब्यावरा में 200 और बैतूल में 174 स्वयंसेवक प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि जिन स्वयंसेवकों ने पूर्व में 7 दिन का प्राथमिक वर्ग का प्रशिक्षण प्राप्त किया है और जो संघ कार्य में सक्रिय हैं, उनमें से ही चयनित कार्यकर्ताओं को संघ शिक्षा वर्ग में प्रशिक्षण हेतु भेजा जाता है।
भोपाल, 17 मई। मध्यभारत प्रांत के विद्यार्थी कार्यकर्ताओं के लिए शिवपुरी में, तरुण व्यवसायी कार्यकर्ताओं के लिए ब्यावरा में और 40 से अधिक आयुवर्ग के कार्यकर्ताओं के लिए बैतूल में संघ शिक्षा वर्गों का आयोजन किया जा रहा है। तीनों ही स्थानों पर संघ शिक्षा वर्गों का औपचारिक उद्घाटन 17 मई को हुआ। संघ शिक्षा वर्ग में शामिल शिक्षार्थियों को शारीरिक, बौद्धिक, योग, सेवा, प्रबंधन और संघ कार्य का प्रशिक्षण प्राप्त होगा। संघ का कार्य व्यक्ति निर्माण का कार्य है। 15 दिन के वर्ग में कार्यकर्ता कठोर अनुशासित दिनचर्या का पालन करते हुए अपने व्यक्तित्व को सुदृढ़ करेंगे।
शिवपुरी के सरस्वती विद्यापीठ आवासीय विद्यालय फतेहपुर में संघ शिक्षा वर्ग (विद्यार्थी) का आयोजन किया जा रहा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, मध्यभारत के प्रांत प्रचारक विमल गुप्ता ने शिवपुरी में संघ शिक्षा वर्ग के उद्घाटन सत्र में कहा कि संघ शिक्षा वर्ग एक साधना स्थली है, जहाँ शिक्षार्थी साधक के रूप में नित्य शारीरिक, बौद्धिक एवं व्यवस्थात्मक प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं। यह सभी प्रशिक्षण मन की साधना से ही संभव हैं।
उन्होंने कहा कि संघ शताब्दी वर्ष में कार्य विस्तार एवं कार्य के दृढ़ीकरण हेतु प्रशिक्षण प्राप्त करना सौभाग्य का विषय है। वर्ग में प्रशिक्षण प्राप्त करने से समूह में काम करने का स्वभाव बनता है। संघ के वैचारिक अधिष्ठान की स्पष्टता होती है। साथ ही, समय प्रबंधन, आत्मविश्वास, संवेदना, स्वावलंबन और अनुशासन जैसे गुणों का विकास होता है। उन्होंने कहा कि वर्ग में 24 घंटे की व्यस्ततम दिनचर्या में स्वयं को व्यस्त रखते हुए सीखने के मानस से शिक्षार्थी प्रशिक्षण प्राप्त करता है। उन्होंने कहा कि संघ शिक्षा वर्ग में शिक्षार्थी विभिन्न प्रकार के प्रबंधन भी सीखता है, जैसे – समय प्रबंधन, मानव प्रबंधन, वित्तीय प्रबंधन, संसाधन प्रबंधन, आपदा प्रबंधन और कार्यक्रम प्रबंधन आदि।
वर्ग केवल प्रशिक्षण नहीं, स्वयं को गढ़ने का अवसर – डॉ. राजेश सेठी
ब्यावरा में व्यवसायी कार्यकर्ताओं के संघ शिक्षा वर्ग के उद्घाटन सत्र में सह प्रांत संघचालक डॉ. राजेश सेठी ने कहा कि संघ शिक्षा वर्ग व्यक्ति के कौशल विकास, व्यक्तित्व निर्माण और वैचारिक स्पष्टता का केंद्र है। अच्छे कार्यकर्ता बनने के लिए केवल शारीरिक क्षमता पर्याप्त नहीं, बल्कि बौद्धिक और भावनात्मक विकास भी आवश्यक है। यही कारण है कि संघ शिक्षा वर्ग में तीनों आयामों पर समान रूप से काम किया जाता है। ‘राष्ट्र प्रथम’ केवल नारा नहीं, बल्कि जीवन का मूल भाव होना चाहिए। उन्होंने कहा कि संघ की कार्यपद्धति वैज्ञानिक, अनुशासित और पूर्ण है, जो भारत को परम वैभव तक पहुंचाने में सक्षम है। इस अवसर पर मंच पर सर्वाधिकारी योगेश गौतम उपस्थित रहे।
डॉ. राजेश सेठी ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में भारत के पास वह सांस्कृतिक और आध्यात्मिक शक्ति है, जो पूरे विश्व को विनाश से बचाने का मार्ग दिखा सकती है। भारतीय दर्शन ‘विश्व कल्याण’ और ‘धर्म की जय’ की बात करता है। धर्म के अनुरूप राज्य व्यवस्था और समाज व्यवस्था ही विश्व शांति और कल्याण का आधार बन सकती है।
शारीरिक एवं आध्यात्मिक विकास में सहायक हैं वर्ग – अशोक पांडेय
बैतूल स्थित भारत भारती विद्यालय परिसर में संघ शिक्षा वर्ग (विशेष) उद्घाटन सत्र में सर्वाधिकारी कविंद्र कियावत, प्रांत संघचालक अशोक पांडेय ने भारत माता की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर वर्ग का शुभारंभ किया। वर्ग में 40 वर्ष से अधिक आयु के स्वयंसेवक ही अपेक्षित हैं।
अशोक पांडेय ने कहा कि संघ शिक्षा वर्ग एक साधना है जो शिक्षार्थियों के शारीरिक एवं आत्मिक विकास में सहायक है। साधना कठिनता से सफल होती है। जो कठिनाइयों में जी नहीं सकता, वह कभी साधक नहीं बन सकता है। अपने संघ कार्य को मजबूती देने के लिए हम इस वर्ग में प्रशिक्षण ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज संघ जिस सफलता के शिखर पर है, उसके पीछे कई पीढियों की अनथक साधना है। गीता का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि गीता के छठे अध्याय के 35वें श्लोक में भगवान श्री कृष्ण ने मन को बड़ा चंचल बताया है और कहा है – निरंतर अभ्यास से ही मन को नियंत्रित किया जा सकता है। समाज में शाखा की भूमिका जागरण श्रेणी के माध्यम से स्पष्ट हो सके और शाखा समाज परिवर्तन का केंद्र बन सके, इसलिए हम वर्ग में प्रशिक्षण लेने आए हैं।
31 जिलों के 743 स्वयंसेवक ले रहे प्रशिक्षण
संघ की रचना के 31 जिलों के कुल 743 स्वयंसेवक तीनों वर्गों में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। इनमें शिवपुरी में 369 स्वयंसेवक शामिल हुए हैं। ब्यावरा में 200 और बैतूल में 174 स्वयंसेवक प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि जिन स्वयंसेवकों ने पूर्व में 7 दिन का प्राथमिक वर्ग का प्रशिक्षण प्राप्त किया है और जो संघ कार्य में सक्रिय हैं, उनमें से ही चयनित कार्यकर्ताओं को संघ शिक्षा वर्ग में प्रशिक्षण हेतु भेजा जाता है।

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