हमारी संस्कृति विविधता में एकता का दर्शन कराती है – रघुवीरसिंह जी सिसौदिया

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सह प्रांत कार्यवाह रघुवीर सिंह जी सिसौदिया ने कहा कि मां भारती की सेवा का अवसर हमारे जीवन में आया है। सामूहिक जीवन जीने की कला सीखने का यह अवसर है। आनंद एवं उत्साह का वातावरण हमें निर्माण करना है। सुख सुविधाओं को छोड़कर वर्ग में कार्यकर्ता बनने हेतु प्रशिक्षण लेने के लिए हम आए हैं।

इंदौर, 17 मई 2026। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मालवा प्रांत के संघ शिक्षा वर्ग-सामान्य (विद्यार्थी) मन्दसौर में विधिवत रूप से प्रारंभ हुआ। वर्ग में 28 जिलों से चयनित 302 शिक्षार्थी उपस्थित हैं। 15 दिनों तक चलने वाले संघ शिक्षा वर्ग में शिक्षार्थी संघ की कार्यपद्धति सह-जीवन, अनुशासन आदि का प्रशिक्षण लेंगे। वर्ग का शुभारम्भ भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर वर्ग के सर्वाधिकारी जैनेन्द्र जैन, वर्ग पालक मालवा प्रांत के सह प्रांत प्रचारक केतन सोजीतरा, वर्ग कार्यवाह डॉ. सुमंत कुशवाह उपस्थित रहे।

सह प्रांत कार्यवाह रघुवीर सिंह जी सिसौदिया ने कहा कि मां भारती की सेवा का अवसर हमारे जीवन में आया है। सामूहिक जीवन जीने की कला सीखने का यह अवसर है। आनंद एवं उत्साह का वातावरण हमें निर्माण करना है। सुख सुविधाओं को छोड़कर वर्ग में कार्यकर्ता बनने हेतु प्रशिक्षण लेने के लिए हम आए हैं।

हिन्दू संस्कृति क्या है? हमारी भारतीय संस्कृति विविधता में एकता का दर्शन कराती है, कई आक्रमणों को झेलकर भी हम आज जीवित हैं। अनेकता में एकता का दर्शन भारतीय संस्कृति का मूल है। हमारी संस्कृति निर्जीव वस्तुओं को भी देवता के समान मानती है। मिट्टी, नदी, पहाड़ इत्यादि पूजे जाते हैं। हम जब कोई नवीन वाहन या यंत्र, उपकरण भी खरीदते हैं तो उसका पूजन करते हैं। चार धाम यात्रा एवं तीर्थ यात्रा अपनत्व का भाव जागरण करने हेतु की जाती है। पूरे विश्व से सताए लोगों को भारत ने हमेशा संरक्षण दिया है और वह हमारे देश में सुख-चैन से रह भी रहे हैं। विश्व का कल्याण हो, यह हम कहते ही नहीं, अपितु आचरण से करके दिखाते हैं। सर्वे भवन्तु सुखिनः का भाव हमेशा हमारे मन में रहता है। इसीलिए कोराना काल के दौरान अन्य देशों को भी वैक्सीन हमने पहुंचाई। आज विश्व में कई देश अपने स्वार्थ सिद्धि के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति केवल पूजा भक्ति तक सीमित नहीं है, यह जीवन जीने की कला है। हमें इसका संरक्षण करना है। संघ का स्वयंसेवक होना ही अपने आप में भाग्यशाली पल है। इस वर्ग में कुछ सीखें, सीखने के बाद आप देश, परिवार, समाज, नगर, ग्राम के लिए कुछ कर पाए तभी यह वर्ग सार्थक सिद्ध हो पाएगा।

संघ शिक्षा वर्ग का शाजापुर में शुभारंभ

मालवा प्रांत के संघ शिक्षा वर्ग-सामान्य (व्यवसायी) का शुभारंभ रविवार को शाजापुर स्थित सरस्वती विद्या मंदिर, दुपाड़ा रोड परिसर में हुआ। वर्ग का शुभारंभ प्रांत संघचालक डॉ. प्रकाश जी शास्त्री, वर्ग सर्वाधिकारी प्रवीण जी सैनी, वर्ग कार्यवाह राधेश्याम जी पाटीदार ने दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया। डॉ. प्रकाश जी शास्त्री ने कहा कि संघ शिक्षा वर्ग केवल प्रशिक्षण का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्रभाव और व्यक्तित्व निर्माण की एक साधना है। 15 दिनों तक परिवार और व्यक्तिगत सुविधाओं से दूर रहकर स्वयंसेवक सामूहिक जीवन, अनुशासन, आत्मनिर्भरता और संगठनात्मक जीवन का अभ्यास करते हैं। वर्ग का उद्देश्य ऐसे कार्यकर्ता तैयार करना है, जो समाज और राष्ट्र के प्रति समर्पित भाव से कार्य करते हुए अपने परिवार, व्यवसाय और सामाजिक दायित्वों का भी प्रमाणिकता के साथ निर्वहन करे।

उन्होंने कहा कि संघ कार्य का मूल मंत्र “व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण” है। वर्ग में कम साधनों में सामूहिकता के साथ जीवन जीने की प्रक्रिया स्वयंसेवकों में समायोजन, सहनशीलता और सहयोग की भावना विकसित करती है।

संघ शिक्षा वर्ग में मालवा प्रांत के 8 विभागों के 28 जिलों से कुल 233 शिक्षार्थी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।

वर्ग परिसर में “वंदे मातरम्” के 150 वर्ष एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की 100 वर्षों की गौरवपूर्ण यात्रा पर आधारित विशेष प्रदर्शनी भी लगाई गई है। प्रदर्शनी में राष्ट्र जागरण, सेवा, सामाजिक समरसता, ग्राम विकास, परिवार प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण एवं संगठन विस्तार से जुड़े विभिन्न आयामों को चित्रों और जानकारी के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है।

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