गुरु के सिंह राशि में प्रवेश के शुभ मुहूर्त में वैदिक मंत्रोच्चार और शंखनाद के बीच संपन्न हुआ धर्मध्वजारोहण; मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस सहित देशभर के संत-महंत उपस्थित रहे।
त्र्यंबकेश्वर, ३१ अक्टूबर २०२६। पृथ्वी, जल, आकाश और सम्पूर्ण चराचर जगत् के कल्याण की मंगल प्रार्थना करते हुए, त्र्यंबकेश्वर स्थित पवित्र कुशावर्त तीर्थ पर सिंहस्थ कुम्भ पर्व की पावन धर्मध्वजा का अत्यंत भक्तिमय एवं ऊर्जावान वातावरण में आरोहण संपन्न हुआ। शनिवार दोपहर ठीक १२ बजकर २ मिनट पर गुरु ग्रह के सिंह राशि में प्रवेश करते ही, शृंगेरी पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य श्री विधुशेखर भारती स्वामी जी महाराज ने सिंहस्थ कुम्भ पर्व के धर्मध्वज का शास्त्रोक्त विधि-विधान से आरोहण करवाया।
कुशावर्त तीर्थ पर आयोजित त्रिखंडी सिंहस्थ कुम्भ पर्व के धर्मध्वजारोहण समारोह में देशभर के सभी प्रमुख अखाड़ों के श्रीमहंत, मठाधीश, पीठाधीश्वर एवं पूज्य साधु-संत विशाल संख्या में उपस्थित रहे। यह भव्य आयोजन प्रमुख अखाड़ों, श्री त्र्यंबकेश्वर देवस्थान ट्रस्ट, कुम्भ मेला प्राधिकरण, त्र्यंबकेश्वर नगर परिषद और स्थानीय पुरोहित संघ के संयुक्त तत्त्वाधान में अत्यंत अनुशासित एवं सुव्यवस्थित रीति से संपन्न हुआ। आरोहित किए गए इस पवित्र धर्मध्वज पर सिंह, गरुड़, सूर्य एवं चंद्र की आकृतियों के साथ १२ राशियां तथा २७ नक्षत्र अत्यंत कलात्मक रूप से उत्कीर्ण किए गए हैं।
परंपरागत मानकरी और वैदिक मंत्रोच्चार
सनातन परंपरा के अनुरूप समाज का प्रतिनिधित्व करने वाले पारंपरिक मानकरी श्री गणेश मोरे एवं श्री निलेश मोरे ने अत्यंत निष्ठा और शास्त्रोक्त विधि से धर्मध्वजा का आरोहण किया। घनपाठी वेदमूर्ति ब्राह्मणों के प्रचंड वैदिक मंत्रघोष के बीच यह अनुष्ठान पूर्ण हुआ। इस पावन सोहळे का पौरोहित्य पुरोहित त्रिविक्रम जोशी, सौरक्ष दीक्षित, ग्रामजोशी संजय मूळे एवं केदारशास्त्री पाटणकर ने संपन्न कराया। धर्मध्वज के फहराते ही सम्पूर्ण कुशावर्त क्षेत्र शंखनाद और ‘हर-हर महादेव’ के गगनभेदी जयकारों से गुंजायमान हो उठा।
परिक्रमा एवं माँ गोदावरी की भव्य महाआरती
धर्मध्वज पूजन के उपरांत शंखध्वनि के साथ ध्वजराज की आरती उतारी गई। तत्पश्चात जगद्गुरु शंकराचार्य एवं मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने धर्मध्वज की परिक्रमा कर भगवान त्र्यंबकेश्वर के चरणों में राष्ट्र-कल्याण की प्रार्थना की।
मंत्रोच्चार, शंखनाद और जयघोष के बीच संपन्न अलौकिक सोहळे में उपस्थित साधु-संतों एवं असंख्य श्रद्धालुओं ने अलौकिक अनुभूति प्राप्त की। ध्वजारोहण के उपरांत जीवनदायिनी माँ गोदावरी की भव्य महाआरती की गई। त्र्यंबकेश्वर की सनातन धार्मिक परंपरा के स्वर्णिम अध्याय ने सिंहस्थ कुम्भ मेले के दैदीप्यमान आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक गौरव को पुनः स्थापित किया है।

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