रूढ़ि से प्रगति की ओर – घुमंतू समाज के युवा व्यसन मुक्त होकर स्वरोजगार की तरफ कदम बढ़ाएं…

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घुमंतू समाज के युवाओं को एक मंच पर लाकर वर्तमान समय में रोजगार, स्वरोजगार, पारंपरिक व्यवसायों के समक्ष उत्पन्न चुनौतियों, कौशल विकास, नवाचार तथा समाज के समग्र विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर मंथन किया गया।

उदयपुर, 20 जुलाई 2026। घुमंतू समाज के युवक-युवतियों तथा समाज के प्रमुख जनों का सम्मेलन प्लेसमेंट सभागार, सीटीएई महाविद्यालय, महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमपीयूएटी), उदयपुर में संपन्न हुआ। उदयपुर में अपने प्रकार का यह पहला सम्मेलन रहा, जिसमें घुमंतू समाज के युवाओं को एक मंच पर लाकर वर्तमान समय में रोजगार, स्वरोजगार, पारंपरिक व्यवसायों के समक्ष उत्पन्न चुनौतियों, कौशल विकास, नवाचार तथा समाज के समग्र विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर मंथन किया गया।

कार्यक्रम का उद्देश्य केवल समस्याओं की चर्चा करना नहीं, बल्कि युवाओं को नई दिशा, आत्मविश्वास और व्यावहारिक समाधान प्रदान करना था। सम्मेलन में समाज के विभिन्न क्षेत्रों से आए शिक्षाविदों, विशेषज्ञों एवं वरिष्ठजनों ने युवाओं का मार्गदर्शन किया। सम्मेलन की विशेषता रही कि औपचारिक कार्यक्रम प्रारंभ होने से पूर्व सभी प्रतिभागियों, अतिथियों एवं वक्ताओं ने परिचय एवं सहज संवाद किया। इस अनौपचारिक चर्चा ने युवाओं और विशेषज्ञों के बीच विचारों के आदान-प्रदान का वातावरण बनाया।

प्रथम सत्र में वक्ता ग्रामीण विकास मंत्रालय के तत्वाधान द्वारा संचालित आईसीआईसीआई (आरसेटी) से कौशलेन्द्र सिंह ने बताया कि आरसेटी बेरोज़गार युवाओं और युवतियों को निःशुल्क कौशल प्रशिक्षण प्रदान कराती है। तथा प्रशिक्षण पूर्ण होने पर टूलकिट एवं भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त प्रमाण पत्र दिया जाता है। बेरोज़गारों को उनकी रुचि के अनुसार कौशल में निपूर्ण बनाना है ताकि वे भविष्य में अपने को बेहतर दिशा दे सकें। अपना स्वयं का रोज़गार शुरू कर सकें।

उद्योगपति हेमंत जैन ने युवाओं को स्वरोजगार तथा उनके लिए किया जा रहे कार्यों पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम अध्यक्ष दीपक शुक्ला ने कहा कि प्रत्येक समाज की ताकत उसका युवा होता है, जिस प्रकार हनुमान जी को जामवंत ने अपनी ताकत का स्मरण दिलाया है, वैसे ही हम सब युवाओं को अपनी अंदर की प्रतिभा और ताकत को पहचान उसके अनुसार कार्य करना चाहिए।

ल्लभनगर पशु चिकित्सा महाविद्यालय के डीन डॉ. शिव शर्मा ने बताया कि घुमंतू समाज मूलतः पशुपालक समाज रहा है, आवश्यकता केवल इस बात की है कि वह पशुपालन को व्यवस्थित करे तो वह न केवल अपने परिवार का, बल्कि अन्य परिवारों को रोजगार देने वाला भी बन सकता है।

सम्मेलन के संवाद सत्र में युवक-युवतियों ने रोजगार, स्वरोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, कौशल विकास, शिक्षा, सरकारी योजनाओं की जानकारी, पारंपरिक व्यवसायों की चुनौतियों तथा आर्थिक और सामाजिक समस्याओं से जुड़े अनेक प्रश्न रखे। विशेषज्ञों ने सभी प्रश्नों का विस्तार से उत्तर देते हुए युवाओं को व्यावहारिक समाधान, प्रशिक्षण, सरकारी योजनाओं और उद्यमिता के अवसरों की जानकारी दी।

कार्यक्रम के दौरान शिक्षा, कला, खेल, सामाजिक सेवा एवं अन्य क्षेत्रों में उत्कृष्ट उपलब्धियाँ प्राप्त करने वाले प्रतिभाशाली युवा-युवतियों का सम्मान कर उनका उत्साहवर्धन किया गया।

समापन सत्र में प्रसिद्ध चित्रकार, घुमंतू जाति उत्थान न्यास के डॉ. पुष्कर लोहार ने कहा कि किसी भी समाज की सबसे बड़ी शक्ति उसके जागरूक, संस्कारित और आत्मविश्वासी युवा होते हैं। उन्होंने युवाओं से अपने पूर्वजों की गौरवशाली परंपरा, संघर्ष, त्याग और समाज के लिए किए योगदान से प्रेरणा लेकर समाज निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। घुमंतू समाज की पारंपरिक कला, शिल्प, हस्तकला एवं व्यवसाय केवल आजीविका का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की सांस्कृतिक पहचान और गौरवशाली विरासत हैं। युवा इन परंपरागत कौशलों को आधुनिक तकनीक, डिज़ाइन, नवाचार और डिजिटल विपणन से जोड़कर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर तक ले जा सकते हैं। अपनी जड़ों से जुड़े रहकर आधुनिक सोच के साथ आगे बढ़ना ही भविष्य की सफलता का मार्ग है।

उन्होंने कहा कि पहला नशा.. शराब, तंबाकू एवं अन्य मादक पदार्थों का है, जो व्यक्ति और परिवार दोनों को कमजोर करता है, जबकि दूसरा नशा मोबाइल और सोशल मीडिया की अनियंत्रित लत का है, जो युवाओं की एकाग्रता, समय और भविष्य को प्रभावित कर रही है। यदि युवा इन दोनों व्यसनों से स्वयं को बचा लें, तो वे अपने जीवन में नई ऊँचाइयाँ प्राप्त कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि स्वरोजगार, उद्यमिता, नवाचार तथा पारंपरिक व्यवसायों का आधुनिकीकरण ही भविष्य की दिशा है। उन्होंने घुमंतू जाति उत्थान न्यास द्वारा समाज के उत्थान के लिए संचालित छह प्रमुख रचनात्मक कार्यों की जानकारी भी युवाओं को दी तथा उनसे इन अभियानों में सक्रिय सहभागिता निभाने का आग्रह किया।

 

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