कार्यक्रम में उपस्थित सेविकाओं, शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं नागरिकों ने वंदनीया मौसीजी के आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाने तथा सेवा, संस्कार और राष्ट्र समर्पण की इस गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने का सामूहिक संकल्प लिया।
नई दिल्ली, 8 जुलाई 2026। राष्ट्र सेविका समिति, दिल्ली प्रांत के प्रबुध वर्ग मेधाविनी सिंधु सृजन द्वारा समिति की संस्थापक एवं आद्य संचालिका वंदनीया लक्ष्मीबाई केलकर (मौसीजी) के अवतरण दिवस पर "संकल्प दिवस" का गरिमामय आयोजन सर शंकर लाल कॉन्सर्ट हॉल, विश्वविद्यालय मार्ग, में संपन्न हुआ।
इस वर्ष का संकल्प दिवस, राष्ट्र सेविका समिति की सेवा, समर्पण और राष्ट्र निर्माण की 90 वर्षों की गौरवपूर्ण यात्रा को समर्पित था। इस अवसर पर वंदनीया मौसीजी के राष्ट्रजीवन, नारी जागरण और समाजसेवा के आदर्शों का स्मरण करते हुए उपस्थित जनों ने स्वयं को समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों के निर्वहन हेतु पुनः संकल्पित किया।
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता अखिल भारतीय सह कार्यवाहिका माननीया अलका इनामदार जी रहीं।मेधाविनी प्रान्त संयोजिका प्रो. निशा राणा जी ने विषय की प्रस्ताना दी।राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष माननीया विजया रहाटकर जी मुख्य अतिथि तथा नई दिल्ली की सांसद माननीया बांसुरी स्वराज जी कार्यक्रम की अध्यक्षा के रूप में उपस्थित रहीं। विशिष्ट अतिथियों के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रचार टोली के सदस्य माननीय मुकुल कानिटकर जी एवं डूटा के अध्यक्ष प्रो. वी. एस. नेगी जी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए राष्ट्र निर्माण में संगठित नारी-शक्ति की भूमिका को रेखांकित किया।प्रो.चारु कालरा जी तथा अंजू आहूजा जी ने मंच साझा किया।
इस अवसर पर समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट सेवा सहयोग देने वाली नौ विशिष्ट महिलाओं को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में उपस्थित सेविकाओं, शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं नागरिकों ने वंदनीया मौसीजी के आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाने तथा सेवा, संस्कार और राष्ट्र समर्पण की इस गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने का सामूहिक संकल्प लिया।
विजय रहाटकर
- जब देश की महिला संकल्प लेती है तब समझ ही नहीं पूरा देश बदल जाता है।
- दुनिया भारत की ताकत अर्थव्यवस्था से नहीं मातृशक्ति से नपेगी।
- विकसित भारत 2047 पूरे भारत का संकल्प है।
- महिला हर जगह चाहे वह साइंस स्पेस टेक्नोलॉजी मेडिसिन सब में भारत की महिलाएं सबसे आगे हैं।
मुकुल कानिटकर जी
- भारतीय नारी सारे विश्व में अग्रणी होकर अपना परचम लहरा रही है।
- आने वाली शताब्दी मातृशक्ति की शताब्दी हैं।
- आधुनिक होने के लिए प्राचीनता छोड़नी नहीं पड़ती।
- जिसकी पूजा करते हैं उसके जैसा बनना ही पूजा है।
बांसुरी स्वराज जी
- जब व्यक्ति अपने वास्तविकता से परिचित होता है तब उसकी जड़े कोई नहीं हिला सकता।
- नारीवाद और समानता पाश्चात्य से गोद लेने की जरूरत नहीं है।
- मातृत्व, कृतत्व और नेतृत्व से महिला इस देश की निर्माता होगी।
- महिला गुरु व ईंट की भूमिका निभाती है जिससे राष्ट्र की नींव बनने वाली है।
अलका ईमानदार जी
- विश्व में आज सबसे बड़ा महिला संगठन आज राष्ट्र सेविका समिति है जिसकी 5000 शाखाएं है।
- हिंदुत्व हमारी पहचान और हमारे राष्ट्र की भी पहचान है।
- महिला का प्रथम कर्तव्य है अगली पीढ़ी को संस्कार देना।

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