रविवार को आयोजित हो रहे इस कार्यक्रम में ब्रिटेन के 310 से अधिक सामुदायिक संगठनों और संस्थाओं के भाग लेने की संभावना है।
लंदन, 4 सितंबर 2026। वर्ष 1925 में हिन्दू सभ्यता और सांस्कृतिक मूल्यों के आधार पर स्थापित वैचारिक अभियान, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, अपनी स्थापना का शताब्दी वर्ष मना रहा है। इस उपलक्ष्य में संघ द्वारा विश्व समुदाय के साथ सभ्यतागत संपर्क एवं संवाद कार्यक्रमों की एक विस्तृत श्रृंखला आयोजित की जा रही है, जिसकी परिणति संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी के 2 से 7 सितंबर 2026 तक लंदन प्रवास के रूप में हो रही है।
आरएसएस की स्थापना भारत के स्वाधीनता संग्राम के दौरान डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जी ने की थी। उनका दृढ़ विश्वास था कि स्वाधीनता प्राप्त होने के बाद उसकी राजनीतिक और आर्थिक स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए एक सबल और संगठित समाज का होना आवश्यक है। विगत एक शताब्दी में संगठन एक ऐसे सभ्यतागत अभियान के रूप में विकसित हुआ है, जो पूरे भारत में समाज सेवा के कार्य में निःस्वार्थ भाव से लगे स्वयंसेवकों द्वारा संचालित है।
सेवा की एक शताब्दी
विगत एक शताब्दी में आरएसएस ने ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ अर्थात विश्व एक परिवार है, की अवधारणा पर आधारित समाज सेवा की एक कार्य-संस्कृति विकसित की है। इसके केंद्र में व्यक्तिगत चरित्र-निर्माण की संकल्पना है, जिसे आरएसएस व्यापक सामाजिक शक्ति की आधारशिला मानता है।
आरएसएस के वार्षिक प्रतिवेदन (वर्ष 2025-26) के अनुसार, भारत भर में 1,52,000 से अधिक सेवा कार्य संचालित हैं, जिनमें शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक कल्याण, स्वावलंबन और समाज जीवन के अन्य क्षेत्र सम्मिलित हैं। पूरे भारत में संघ की 1,34,000 से अधिक स्थानों पर नियमित लोग एकत्रित होते हैं, जिनमें दैनिक शाखाएं, तथा साप्ताहिक और मासिक मिलन सम्मिलित हैं।
आरएसएस का दृष्टिकोण साझा सभ्यतागत मूल्यों, विविधता में एकता और सामाजिक समरसता पर केंद्रित है। इसका कार्य सामाजिक एकता को सुदृढ़ करने के लिए है और यह हर प्रकार के विभाजन, कट्टरपंथ और हिंसा का निषेध करता है। शताब्दी वर्ष में संघ ने समाज के व्यापक हित में पांच प्राथमिकताएं निर्धारित की हैं – सामाजिक समरसता; पारिवारिक मूल्यों को सुदृढ़ करना; पर्यावरण के प्रति उत्तरदायित्व; स्वावलंबन; और नागरिक कर्तव्य।
विस्तृत सभ्यतागत संवाद
शताब्दी वर्ष के दौरान आरएसएस ने विश्व भर के समुदायों और संस्थाओं के साथ सभ्यतागत संवाद के व्यापक कार्यक्रम के माध्यम से अपने अनुभव साझा करने का प्रयास किया है। इस वैश्विक संपर्क की कड़ी के रूप में अप्रैल 2026 में आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने यूनाइटेड किंगडम, संयुक्त राज्य अमेरिका और जर्मनी का भ्रमण किया। उनके कार्यक्रमों में लंदन का चैथम हाउस, संयुक्त राज्य अमेरिका में स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय और हडसन इंस्टीट्यूट तथा बर्लिन में जर्मनी के प्रमुख नीति संस्थानों के साथ ही शिक्षाविदों, सांसदों, व्यापार जगत के प्रतिनिधियों, सामुदायिक प्रतिनिधियों और भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्यों के साथ चर्चा शामिल थी। इन वार्ताओं में सभ्यतागत दृष्टिकोण, सामाजिक एकजुटता और समकालीन वैश्विक चुनौतियों के प्रति साझा प्रतिक्रियाओं पर विचार-विमर्श हुआ।
इसी क्रम में सरसंघचालक डॉ. भागवत जी पहले न्यूयॉर्क, टोरंटो और अब लंदन में इस सभ्यतागत संवाद शृंखला को आगे बढ़ा रहे हैं।
न्यूयॉर्क में 29 अगस्त 2026 को AHEAD (American Hindus for Engagement and Dialogue) के आमंत्रण पर उन्होंने विभिन्न संप्रदायों और धर्मों के 175 प्रतिभागियों की उपस्थिति वाली बैठक को संबोधित किया। उन्होंने मैडिसन स्क्वायर गार्डन में “Universal Oneness” सम्मेलन को भी संबोधित किया, जिसमें 39 अमेरिकी राज्यों और 853 शहरों से आए 250 संस्थाओं के 6000 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। संयुक्त राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों के लगभग 250 छात्रों ने भी इस संवाद में भाग लिया। इस सर्वपंथीय धर्मगुरुओं की बैठक में पांच-सूत्रीय “Call for Action” संकल्प स्वीकार किया गया।
इसके बाद डॉ. भागवत जी CHORD (Canadian Hindus for Outreach, Relations and Dialogue) के आमंत्रण पर टोरंटो गए, जहाँ उन्होंने “Hindu Vishwa Bandhu” सम्मेलन को संबोधित किया। इसमें कनाडा के सभी दस प्रांतों के 175 संगठनों के 2000 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
लंदन प्रवास का विवरण
डॉ. मोहन भागवत जी शताब्दी संपर्क कार्यक्रम के अंतिम चरण के अंतर्गत 2 सितंबर को लंदन पहुंचे।
लंदन के इस विस्तृत कार्यक्रम का आयोजन और समन्वय ब्रिटेन स्थित संगठन इंटीग्रल ने किया है, यह संस्था यूके के अंदर और यूके-भारत के मध्य संवाद, सहयोग और दीर्घकालिक संबंधों को सुदृढ़ करने के लिए नेतृत्व और समुदायों को साथ लाकर कार्य करती है। डॉ. भागवत जी का यूके में स्वागत और उनकी यात्रा के दौरान व्यापक संपर्क कार्यक्रम को सहयोग देने के लिए इंटीग्रल के साथ ब्रिटेन स्थित 115 से अधिक सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन भी जुड़े हैं।
अपनी इस यात्रा के दौरान डॉ. भागवत जी धर्मगुरुओं, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और अन्य सामाजिक हस्तियों से भेंट कर रहे हैं। अपनी सर्वपंथीय सहभागिता के अंतर्गत उन्होंने विल्सडेन स्थित श्री स्वामीनारायण मंदिर और खालसा जत्था ब्रिटिश आइल्स गुरुद्वारे का दौरा किया तथा लंदन के एक जैन मंदिर में भी जाने का कार्यक्रम है।
6 सितंबर 2026 को “Celebration of Oneness” विषय के अंतर्गत सामुदायिक नेतृत्वकर्ताओं के साथ सभ्यतागत संवाद कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम की पहल हिन्दू स्वयंसेवक संघ, यूके ने की है। हिन्दू स्वयंसेवक संघ, यूके वर्ष 1966 में ब्रिटेन में स्थापित एक हिन्दू सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठन है और इस कार्यक्रम को इंटीग्रल का सहयोग प्राप्त है।
आगामी रविवार को आयोजित हो रहे इस कार्यक्रम में ब्रिटेन के 310 से अधिक सामुदायिक संगठनों और संस्थाओं के भाग लेने की संभावना है।
लंदन का यह कार्यक्रम भी न्यूयॉर्क तथा टोरंटो में डॉ. मोहन भागवत जी द्वारा साझा किए गए आरएसएस के निःस्वार्थ सेवा और सामाजिक समरसता के अनुभव तथा ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ अर्थात् “पूरा विश्व एक परिवार है” की सभ्यतागत दृष्टि के संदेश को आगे बढ़ाता है।
सुनील आंबेकर
अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस)

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